चंडीगढ़, 18 अप्रैल (ट्रिन्यू)
हरियाणा सरकार ने उन विद्यार्थियों को राहत दी है, जो बहुतकनीकी (पॉलिटेक्निक) व कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण (आईटीआई) में दाखिला लेना चाहते हैं। लॉकडाउन की वजह से इस बार दसवीं और 12वीं के विद्यार्थियों के पेपर नहीं हो सके। तकनीकी कॉलेजों व आईटीआई में कई ट्रेड ऐसे हैं, जिनमें दाखिलों के लिए गणित और साइंस विषय होना अनिवार्य है।
शनिवार को ‘हरियाणा आज’ कार्यक्रम के तहत प्रदेश के लोगों को सम्बोधित करते हुए सीएम ने कहा, पेपर बाद में लिए जाएंगे। ऐसे में बिना पेपर के ही आईटीआई व बहुतकनीकी संस्थानों की लगभग तीन दर्जन ट्रेड में इन विद्यार्थियों को दाखिला मिल सकेगा। इसमें शर्त यह रहेगी कि बाद में इन विद्यार्थियों को पेपर पास करने होंगे। अगर पेपर में फेल हुए तो फिर उन्हें अपनी ट्रेड बदलनी होगी।
छात्रों को ‘थ्री-एस’ का मंत्र देते हुए सीएम ने कहा, ‘स्टे एट होम, स्कूल एट होम व स्टडी एट होम’ को अपनाते हुए अब बच्चे घरों में ही अपना स्कूल लगा लें। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह बेहतरीन अवसर है। 12वीं की बची हुई परीक्षा को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा गाइडलाइन जारी होने के तुरंत बाद रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। सीएम ने कहा, हम स्कूल आपके घर में ला रहे हैं। हम सभी 25 दिनों से लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं और फिलहाल हमें पढ़ाई के तरीकों को बदलना होगा।
बच्चों को घर- घर में मिड-डे मिल दिया जा रहा है। लॉकडाउन खुलने के बाद छात्रों को नई किताबें देंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने चार शिक्षकों और एक छात्र की युवाओं से सीधी बात कराई। नूंह की शिक्षिका नम्रता ने बताया कि कैसे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। सफीदों में तैनात जेबीटी शिक्षक रमेश कुमार ने बताया कि कैसे बच्चों को मिड- डे मील उनके घरों तक पहुंचा रहे हैं। इसी तरह जेबीटी शिक्षक सुनील दत्त ने बताया कि छात्रों को किस तरह किताबें मुहैया कराई जा रही हैं। सिरसा में जीव विज्ञान के प्रोफेसर विवेक गोयल ने बताया कि छात्र ऑनलाइन पढ़ाई में पूरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कुछ छात्रों ने तो अपने स्मार्टफोन ऐसे विद्यार्थियों को दिए हैं, जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन नहीं। सीएम ने इस पर उनकी पीठ थपथपाई। यमुनानगर के छात्र साहिल कंबोज ने आरोग्य सेतु एप की खूबियां बताई। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन का पूरा पालन किया जा रहा है।

छात्रों से मांगा 5-5 रुपये का सहयोग

मुख्यमंत्री ने छात्रों का आह्वान किया कि अपने जेब खर्च से कम से कम 5 रुपये कोरोना रिलीफ फंड में जरूर दान करें। कोरोना से जंग में आर्थिक मदद देने वालों में 50 फीसद से ज्यादा शिक्षा विभाग के कर्मचारी हैं जो करीब 38 करोड़ रुपये दान कर चुके हैं। निजी स्कूल संचालकों से उन्होंने गुजारिश की कि कोई भी स्कूल किसी बच्चे का एडमिशन न रोके। छात्रों से परिवहन शुल्क न लिया जाए और एक-एक महीने की ट्यूशन फीस लेने का सिस्टम बनाएं। आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की फीस माफ कर रहे स्कूलों का आभार जताते हुए सीएम ने कहा कि दूसरे विद्यालयों को भी ऐसे ही कदम उठाने चाहिए।

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