चंडीगढ़, 18 अप्रैल (ट्रिन्यू)

केंद्र व हरियाणा सरकार ने 20 अप्रैल से ऑनलाइन खरीदारी की इजाजत देने का फैसला लिया है। इससे एमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स ऑनलाइन कंपनियों से घर बैठे खरीदारी हो सकेगी।
पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन रणदीप सुरजेवाला ने इस फैसले का विरोध किया है। शनिवार को चंडीगढ़ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रेस काॅन्फ्रेंस में सुरजेवाला ने कहा कि सरकार के इस फैसले से देश के 7 करोड़ से अधिक दुकानदार व व्यापारी तथा हरियाणा के 10 लाख से अधिक व्यापारी व दुकानदार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। ऑनलाइन खरीद शुरू होने से इन कंपनियों व सरकार की तो कमाई होगी लेकिन आम दुकानदारों को इसका नुकसान होगा। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार ने लाखों दुकानदारों व व्यापारियों के धंधे पर तालाबंदी करने की साजिश रची है। सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा का दुकानदार-व्यापारी लगभग 1 माह से अपना व्यापार बंद कर घर में बैठा है और अब लॉकडाउन की यह अवधि 3 मई तक बढ़ा दी गई है। वह टैक्स भी अदा करेगा वहीं अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन भी देगा। फिर भी खट्टर सरकार उसे सजा देने पर उतारू है। अॉनलाइन कंपनियां अपना सामान बेचने को स्वतंत्र होंगी, पर दुकानदार के व्यवसाय पर 3 मई तक तालाबंदी ही रहेगी।

‘25 फीसदी दुकानदार खो बैठेंगे रोजी-रोटी’

सुरजेवाला ने रिटेलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के हवाले से कहा कि 25 प्रतिशत दुकानदार अपनी रोजी-रोटी खो बैठेंगे व 51 प्रतिशत दुकानदार अगले 12 महीने तक शायद एक फूटी कौड़ी मुनाफा भी न कमा पाएं। सुरजेवाला ने कहा कि किसान-आढ़ती के गठजोड़ को नष्ट करने की कोशिश खट्टर सरकार कर रही है। हरियाणा के परिवेश में आढ़ती व किसान का रिश्ता दशकों पुराना है। वहीं आढ़तियों के लिए तय किए गए बैंकों में यस बैंक भी होने पर आपत्ति जताते हुए सुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने डूबते हुए यस बैंक को इस सूची में शामिल किया है। इसके पीछे क्या कारण है। आढ़तियों के सरकारी व दूसरे बैंकों में वर्षों से चल रहे खातों में बैंक लिमिट्स हैं। अब उन खातों का क्या होगा और नए खातों में बैंक लिमिट कैसे मिल पाएगी। सरकार को अपना यह फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए।

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