जांच को आंच और गैर-जिम्मेदार लोग
तमाम विकसित और सभ्य देशों में लंबा अरसा गुजारकर कुछ लोगों ने जिंदगी का यही सलीका सीखा कि निर्दोष लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जाये। पूरी दुनिया में कोरोना की सुनामी के बीच देश लौटकर आए कई प्रवासी तमाम सेहतमंद लोगों को रोग बांट गये। ये घटनाएं विचलित करने वाली हैं कि संक्रमण के बावजूद लोग खुलेआम घूमते रहे और सार्वजनिक आयोजनों की भीड़ का हिस्सा बनते रहे। इन संपन्न और पढ़े-लिखे लोगों की करतूतों का खमियाजा अब देश भुगत रहा है। इस विद्रूपता की पहली कड़ी हमारे वे विभाग हैं, जिनकी नाक के नीचे से ये लोग संक्रमण की जांच कराये बिना पतली गली से निकल गये। नि:संदेह यह बड़ी चूक है। कोरोना के आतंक का खुलासा होने से पहले और बाद में भी विदेशी लोग बिना जांच के भारत के शहरों में घूमते रहे। ऐसे ही इटली के एक जोड़े का दिल्ली से निकलकर सीधे राजस्थान पहुंचने का मामला प्रकाश में आया। फिर इटली से हनीमून मनाकर लौटी महिला के पति के कोरोना से संक्रमित होने की जानकारी होने के बावजूद वह ट्रेन से मायके आगरा चली गई। इतना ही नहीं, उनके रेलवे में इंजीनियर पिता ने भी उसके बारे में प्रशासन को गलत जानकारी दी, जिसके बाद आगरा प्रशासन ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा। इसी तरह जर्मनी से वाया स्पेन होते हुए भारत लौटे बेटे की बीमारी छिपाने तथा विभागीय गेस्ट हाउस में कर्मचारियों को संक्रमित करने पर बंगलुरू की महिला अधिकारी को निलंबित किया गया। ऐसे ही जर्मनी से पंजाब आया एक व्यक्ति लगातार कई जनपदों में सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहा, जिसके चलते तीन जिलों के डेढ़ सौ से अधिक लोगों को अलग-थलग रहने के आदेश दिये हैं। अजीब बात है कि पढ़े-लिखे लोग ऐसी हरकतें कर रहे हैं कि हजारों लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया है। कमोबेश एेसे ही आनंदपुर साहिब में चर्चित होला-मोहल्ला उत्सव में कई संक्रमित लोगों की भागीदारी के बाद लाखों लोगों में प्रभावितों की तलाश भूसे के ढेर में सूई तलाशने जैसा है।
मशहूर सिंगर कनिका कपूर के लंदन से संक्रमित होने के बाद लखनऊ और कानपुर के कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय होने से उत्पन्न खतरे की आहट संसद से लेकर राष्ट्रपति भवन तक महसूस की गई, जिसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री, सांसदों-विधायकों समेत कई गणमान्य लोगों को जांच कराकर एकांतवास में जाना पड़ा। कनिका के खिलाफ बिहार में मुकदमा तक दर्ज किया गया है। पंजाब में जिस तेजी से कोरोना संक्रमित लोगों के मामले सामने आये, उसने पंजाब सरकार के होश उड़ा दिये। ऐसे लोगों की सूची लंबी है जो विदेश से लौटकर बिना जांच कराये गायब हो गये। यही वजह है कि पंजाब में धारा 144 लगाने और लॉकडाउन करने पर भी जब लोग गैर-जिम्मेदार व्यवहार से पीछे नहीं हटे तो मजबूरन सरकार को कर्फ्यू लगाना पड़ा। ऐसे हालात में सिवाय सख्ती के कोई और विकल्प नजर नहीं आता। कैसी विडंबना है कि इस वायरस के घातक प्रभावों से वाकिफ होते हुए भी लोग न केवल अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि दूसरों की जिंदगी से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। कहीं न कहीं सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार व्यवहार के मामले में हम पिछड़ते नजर आ रहे हैं। कायदे-कानूनों की अनदेखी करना अपनी शान समझना सभ्य समाज में शोभा तो नहीं ही देता। वहीं हम दूसरों के जीवन के अधिकार का अतिक्रमण कर रहे होते हैं। इससे दुनिया में भारत के प्रति कोई अच्छा संदेश तो बिलकुल ही नहीं जायेगा। हमें सरकारों की गंभीर व सार्थक पहल में सहयोग करना चाहिए। सरकार ने अब निजी व सरकारी अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों की जांच के निर्देश दिये हैं। नि:संदेह जांच का दायरा जितना बड़ा होगा, कोरोना वायरस से उतना अधिक बचाव हो पायेगा। दुनिया के कुछ देशों ने बड़े पैमाने पर जांच से कोरोना के खतरे को टाला है।

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