स्पाइडर मैन के दौर में धार्मिक हीरो को बचाने की कवायद
चंडीगढ़ के सेक्टर 23 स्थित बाल भवन में चल रहे फिल्म फेस्टिवल में मास्क मेकिंग करते असम से आये कलाकार।
चंडीगढ़, 3 फरवरी (ट्रिन्यू)
चंडीगढ़ के सेक्टर 23 बाल भवन में चल रहे 15वें थिएटर फेस्टविल में सोमवार को मास्क मेकिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया। असम से चंडीगढ़ पहुंचे सुजीत बरूआ की देखरेख में मास्क मेकिंग वर्कशॉप का अायोजन किया गया। यह वर्कशॉप 12 फरवरी तक चलेगी। सुजीत बरूआ ने बताया कि वह पिछले करीब 25 सालों से मास्क मेकिंग कर रहे हैं। इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि वह सिर्फ रामयाण एवं अन्य हिंदू धार्मिक ग्रंथ के पात्रों के ही मुखौटे बनाते हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में वेस्टर्न कल्चर पूरी तरह से हावी हो गया है। अब बच्चे अपने धार्मिक हीरों को नहीं जानते, बल्कि उन्हें स्पाइडर मैन और बेट मैन जैसे पात्र ही पसंद आते हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्टून के मुखौटे देखकर बच्चे तुरंत इनके नाम लेते हैं, लेकिन जब रामायण से जुड़े किसी पात्र का मुखौटा उनके सामने लाया जाता है तो वह उसे नहीं पहचानते। यही कारण है कि वह अपनी कला में धार्मिक ग्रंथ से जुड़े ही पात्रों के मुखौटे बनाते हैं। सुजीत ने बताया कि पहले दिन काफी संख्या में लोगों ने मास्क मेकिंग कला को सीखने में दिलचस्पी दिखाई है।
पिछली 7 पीढ़ियां बना रहीं मुखौटे
सुजीत बरूआ के साथ उनके पिता बीरेंद्र बरूआ भी असम से चंडीगढ़ पहुंचे हैं। बीरेंद्र ने बताया कि जब मंच पर धार्मिक कार्यक्रमों का अायोजन होता है तो उनके बनाए गए मुखौटे कलाकार पहनते हैं। उन्होंने बताया कि जब कोई रामायण पर आधारित प्ले में अभिनय करता है तो मुखौटा पहनने के बाद उसके किरदार को दर्शक और गहराई से समझ सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि चंडीगढ़ में उन्होंने मास्क मेकिंग को लेकर किया अनुभव किया तो उन्होंने बताया कि यहां लोगों में इस कला को सीखने में काफी दिलचस्पी है, बताया कि खासकर युवा थिएटर फेस्टिवल के पहले दिन इस कला को सीखने के लिए काफी उत्सुक दिखाई दिए।
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