टालमटोल
बाल कविता
मामू मेरे टालू राम
करते रहते टाल-मटोल।
खाने की ही बस सोचते
पेटू इनका गोल-मटोल।
चलने को कहते बाजार,
हां चलूंगा कह देते बस।
मामी कहती जाओ न अब,
कर बहाना सो जाते बस।
संग मामी के जाकर तब,
काम की चीजें लाते घर।
‘मुझे जगाया क्यों न बच्चो’
मामू कहते मुंह फुलाकर।
क्यों बहाना करते मामू,
हो तो पूरे टालू राम।
सुधर जाओ अगर चाहते,
नहीं न सुनना टालू राम।
हम को देखो हम समय पर,
कर लेते सब अपने काम।
कब टालते लिखना-पढ़ना,
नहीं टालते हम आराम।
दिविक रमेश
The post टालमटोल appeared first on दैनिक ट्रिब्यून.
from दैनिक ट्रिब्यून http://bit.ly/2YBk5iM
via Latest News in Hindi
0 Comments