पुरानी पुस्तकों का मोल
बाल कहानी
मनजीत कौर
राहुल तीसरी कक्षा में आ गया था। एक हफ्ते की छुट्टी के बाद कल से उसे स्कूल जाना था। नया बैग,नई किताबें, नई वाटर बोतल, नई कक्षा, नये उत्साह के साथ नई मैडम के लिए थोड़ा-सा मन में डर भी था।
‘मम्मी, अब आप पुरानी किताबें यूनिफार्म और बाकी सामान का क्या करोगी?’ राहुल ने जिज्ञासावश पूछा ‘क्योंकि वह अब मेरे काम का नहीं है।’ ‘बेटा किताबें कभी पुरानी नहीं होती, उसमें ज्ञान तो नया ही होता है।
‘हां, आपके लिए उनका महत्व चाहे कम हो गया हो लेकिन किसी और के लिए वे बहुत महत्वपूर्ण हो सकती हैं।’
मां ने राहुल को समझाते हुए कहा, ‘जिस स्कूल में मैं पढ़ाती हूं वहां शाम की इनिंग में निम्न वर्ग के बच्चों के लिए क्लास लगती है।’
‘मां, ये निम्न वर्ग क्या होता है।’
निम्न वर्ग का अर्थ है, ‘जो लोग दिहाड़ी, मेहनत-मज़दूरी करते हैं, रिक्शा चलाते हैं जैसे हमारे घर पर आने वाली काम वाली आंटी। हर एक के घर की आर्थिक स्थिति बराबर नहीं होती, उनके माता-पिता बच्चों को नई किताबें नहीं दिला सकते। यह सामान उन बच्चों के बहुत काम आएगा और वे इसे पाकर बहुत खुश होंगे। सामान किसी बच्चे के काम आ जाए इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है। ऐसा करने से उनकी मदद ही होगी। आप अपने दोस्तों से भी बात करना और उन्हें भी अपना पुराना सामान देने को प्रेरित करना।’ राहुल मां की बातें ध्यान से सुन रहा था।
‘पर मां, उन बच्चों को बुरा तो नहीं लगेगा पुरानी किताबें देने पर।
मां ने राहुल के चेहरे के भाव देखे। नहीं बेटा, ऐसा कुछ नहीं है जो तुम सोच रहे हो। जब मैं छोटी थी मुझे भी तुम्हारी बड़ी मौसी की किताबें ही मिलती थीं। पहले अड़ोस-पड़ोस के बच्चे आपस में किताबें शेयर करते थे और कोई बुरा नहीं मानता था। किताबें नई कक्षा में आते ही एक-दूसरे से बदल लेते थे, जिससे माता-पिता का आर्थिक बोझ कम हो जाता था।
राहुल मां की बातें ध्यान से सुन रहा था और आज उसे पुरानी किताबों, यूनिफॉर्म आदि सामान की उपयोगिता का ज्ञान हो गया था। वह मां से बोला ‘मां आगे से मैं अपनी किताबें और दूसरे सामान को सम्भाल कर रखूंगा ताकि वे हमेशा नई जैसे ही लगे और किसी के काम आ सकें।’
The post पुरानी पुस्तकों का मोल appeared first on दैनिक ट्रिब्यून.
from दैनिक ट्रिब्यून http://bit.ly/2HroKyf
via Latest News in Hindi
0 Comments