विकास की सड़क
हरियाणा के आधारभूत ढांचे की बदलेगी तस्वीर
मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हरियाणा को बीस हजार करोड़ लागत वाली सड़क परियोजनाओं का तोहफा दिया। इसमें ग्यारह सड़कों से जुड़ी योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास वीडियो कॉनफ्रेंिसंग के जरिये किया गया, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-8 और ग्यारह सड़कों से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने साथ ही राज्य के लोगों को भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में हरियाणा को दो लाख करोड़ रुपये की सड़क योजनाएं मिलेंगी। निस्संदेह यदि ये योजनाएं निर्धारित समय पर सिरे चढ़ती हैं तो राज्य के आधारभूत ढांचे की तस्वीर ही बदल सकती है, जिससे न केवल सुरक्षित और रफ्तार वाले यातायात को गति मिलेगी, बल्कि देश की राजधानी तक राज्य के लोगों की पहुंच सरल और सुगम हो पायेगी। निस्संदेह किसी भी राज्य में विकास के अनुकूल वातावरण और औद्योगिक विकास के लिये सुगम यातायात सुविधाएं जरूरी हैं जो बेहतर सड़कों के विस्तार से ही संभव है। केंद्रीय मंत्री द्वारा दक्षिण हरियाणा से जुड़ी करीब चौदह हजार करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है, जिससे जहां उत्तर व दक्षिण हरियाणा में बेहतर जुड़ाव हो पायेगा, वहीं राष्ट्रीय राजधानी व पड़ोसी राज्यों से यातायात सुगम हो पायेगा। खासकर रेवाड़ी-नारनौल राष्ट्रीय राजमार्ग पर अटेली व नारनौल बाईपास बनने से पड़ोसी राज्य राजस्थान के लिये यात्रा सुगम हो पायेगी। साथ ही महेंद्रगढ़ से चरखीदादरी, भिवानी, रोहतक, सोनीपत व कुरुक्षेत्र होते हुए चंडीगढ़ को जोड़ने वाले ग्रीन हाईवे के शिलान्यास ने नई उम्मीदें जगायी हैं। इस तरह की परियोजनाओं से जहां यात्रा सुगम हो पाती है, वहीं ईंधन व समय की भी बचत संभव होती है। इस हाईवे के निर्माण पर लगभग नौ हजार करोड़ की लागत आने का अनुमान है। छह लेन वाले ग्रीन फील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण छह पैकेज में होना है। गडकरी ने रेवाड़ी-पटौदी-गुरुग्राम एनएच 352 राष्ट्रीय राजमार्ग का शिलान्यास भी किया।
इसमें दो राय नहीं कि यदि समय रहते हरियाणा में सड़कों का जाल बिछेगा तो आर्थिकी की धमनियों में समृद्धि का संचार होगा। दरअसल, नितिन गडकरी के पास एम.एस.एम.ई. मंत्रालय भी है। उन्होंने हरियाणा सरकार से इस विभाग के अंतर्गत आने वाली विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया और पूरे सहयोग का आश्वासन दिया, जिससे बेहतर सड़कों के निर्माण से इस राज्य के खेती से जुड़े उद्योगों को गति मिल सके ताकि राज्य की सड़कें विकास की सड़कें साबित हो सकें। दरअसल, इन सड़कों के बनने से जहां उत्तर-दक्षिण हरियाणा में यातायात सुगम-सरल होगा, वहीं पड़ोसी राज्य राजस्थान व उत्तर प्रदेश के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी से औद्योगिक संपर्क सुगम होगा, जो तीव्र आर्थिक विकास की अनिवार्य शर्त भी है। दरअसल, गडकरी का इशारा समृद्ध कृषि वाले हरियाणा के लिये सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के जरिये रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने की ओर था। उनका दावा है कि अगले दो सालों में एमएसएमई क्षेत्र में पांच करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। खासकर एग्रो एमएसएमई के विस्तार को लेकर बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि हरियाणा से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे और ग्रीन कॉरिडोर के जरिये एसएमएमई श्रेणी में आने वाले कृषि आधारित उद्योगों को विस्तार का अवसर मिलेगा। मसलन भविष्य में धान व गन्ने से एथनॉल जैसे विकल्प तैयार करना। केंद्रीय मंत्री ने पंजाब में पराली से सीएनजी गैस बनाने जैसे प्रगतिशील कदम की ओर बढ़ने का आग्रह भी हरियाणा से किया। निस्संदेह जैसे-जैसे सड़कों का विस्तार हरियाणा में होगा, वैसे ही कनेक्टिविटी के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी। इसमें दो राय नहीं कि लगातार बढ़ती जनसंख्या तथा वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते बेहतर भविष्य के लिये सड़कों का विस्तार अपरिहार्य है। यही वजह है कि राज्य के उपमुख्यमंत्री ने कुछ जनपदों में रिंग रोड बनाने का सुझाव भी दिया। ऐसे ही प्रयासों से राज्य में आधारभूत ढांचे की तस्वीर बदलेगी।
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