शमीम शर्मा

जिन बच्चों ने कभी घर पर किताब खोली तक नहीं थी, अब उन्हें घर पर ही बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। यह और बात है कि किताब उन्हें अब भी नहीं खोलनी, बस कंप्यूटर खोलना है। स्कूलों की वर्दी और बैग गये भाड़ में। पानी की बोतल और टिफिन भी किसी कोने में पड़े सुबक रहे होंगे।
बच्चों के होमवर्क के प्रति पापा लोग तो पहले भी आंखें मूंदे हुए थे और अब भी। ऑनलाइन क्लासेज मम्मियों की जान पर आफत बनकर आई है। हर मम्मी अब मम्मी कम और मास्टरनी ज्यादा बन गई है। स्कूलों में कम से कम हर सबजेक्ट के अलग-अलग टीचर होते हैं पर मम्मी तोे आल इन वन हो चुकी है। बेचारी स्पोर्ट्स-डांस से लेकर कंप्यूटर और विज्ञान व व्याकरण तक पढ़ाने में जुटी है। जो मम्मी किसी जमाने में आठवीं-दसवीं में हिंदी-अंग्रेजी में बहुत तंग थी, अब धड़ल्ले से भाषाई ज्ञान छांट रही है और बांट रही है। इसे हरियाणवी में कहते हैं जिनके गितवाड़े मैं गोस्से नहीं हैं, वे भी दुनिया फूक्कण की बात करै हैं।
ऑनलाइन कक्षाओं की सबसे भयानक गाज गिरी है बैक बेंचर्स पर। अब तो उन्हें अकेले ही बैठना है, न कोई आगे और न कोई पीछे। कक्षाओं की चुहलबाजी, लतीफेबाजी, नोकझोंक और दोस्तों के हाथ पकड़ कर स्कूल के गलियारों में घूमना-फिरना व कैंटीन की मस्ती आदि सब गायब।
बच्चे बेचारे घर में रहते हुए भी बेघर से हो गये हैं। मानो किसी ने घोर एकान्त में रहना उनकी नियति तय कर दी है। इन कक्षाओं ने मानो जीवन का सार समझा दिया हो कि अकेले ही आये थे और अकेले ही जाना है। अब इसमें नई बात जुड़ गई है कि अकेले ही रहना है।
मैंने एक बच्चे से पूछा कि ऑनलाइन क्लास में कितना होमवर्क मिलता है? बच्चा कहता—मुझे नहीं मिलता, मैंने तो मैडम को ब्लॉक कर रखा है। दूसरा बोला—मुझे नहीं मिलता वो तो मम्मी-पापा को मिलता है। वे सारा दिन मेरे स्कूल बैग से किताबें निकालने में लगे रहते हैं। और पेरेंट्स के मुंह से एक बात रात-दिन निकल रही है कि स्कूल वालों की धन्य छाती है।
ऑनलाइन क्लास में बच्चों को जब जरा-सा पाठ समझ में आना शुरू होता है तभी ईश्वरीय अनुकम्पा से नेट गायब हो जाता है तो बच्चों का ध्यान ही ऊकचूक हो जाता है। या कभी कमरे में कोई आ गया, कभी रसोई में हलवे या नूडल्स की खुशबू बेचारे बच्चों को पढ़ने ही नहीं देती।
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एक बर की बात है अक गणित की ऑनलाइन क्लास लगाये पाच्छै सुरजा मास्टर बोल्या— टाबरो! न्यूं बताओ आठ का आधा कितणा होया करै? नत्थू धैड़ दे सी खड्या होकै बोल्या—जी आड्डा करकै काटोगे तो दो जीरो अर खड़े नैं काटोगे तो दो तीये बणैंगे।

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