नयी दिल्ली, 7 जून (एजेंसी)
प्रवासी मजदूरों के लिए चलाई गयी विशेष ट्रेनों में 36 बच्चों ने जन्म लिया। इन बच्चों के नाम भी समय के हिसाब से ही रख दिए गए। एक महिला ईश्वरी देवी ने अपनी बेटी का नाम करुणा रखा है तो रीना ने अपने नवजात बेटे को लॉकडाउन यादव नाम दिया।
करुणा के पिता राजेंद्र यादव से जब पूछा गया कि उनके बच्चे के नाम पर ‘कोरोना’ या ‘कोरोनावायरस’ का क्या असर है तो उन्होंने कहा,’सेवा भाव’ और ‘दया’। उन्होंने छत्तीसगढ़ के धरमपुरा में अपने गांव से फोन पर बताया, ‘लोगों ने मुझसे उसका नाम बीमारी पर रखने को कहा। मैं उसका नाम कोरोना पर कैसे रख सकता हूं जब इसने इतने लोगों की जान ले ली और जीवन बर्बाद कर दिए?’ उन्होंने कहा, ‘हमने उसका नाम करुणा रखा जिसका मतलब दया, सेवा भाव होता है जिसकी हर किसी को मुश्किल वक्त में जरूरत पड़ती है।’
श्रमिक स्पेशल ट्रेन से मुंबई से उत्तर प्रदेश का सफर कर रही रीना ने अपने बेटे को लॉकडाउन यादव नाम दिया ताकि जिस मुश्किल वक्त में वह पैदा हुआ उसे हमेशा के लिए याद रखा जाए। एक अन्य महिला, ममता यादव 8 मई को जामनगर-मुजफ्फरपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार हुई थी। वह चाहती थी कि बिहार के छपरा जिले में जब वह अपने बच्चे को जन्म दे तो उनकी मां उनके साथ हो। लेकिन गंतव्य स्टेशन तक पहुंचने से पहले ही उनके हाथ में उनका बच्चा था। ममता के डिब्बे को प्रसव कक्ष जैसे कक्ष में बदल दिया गया जहां अन्य यात्री बाहर निकल गए। डॉक्टरों की एक टीम और रेलवे स्टाफ ने ममता की मदद की।
सोशल मीडिया पर चले थे ऐसे कई नाम
ट्रेन में शिशु जन्मने की यह दास्तां तो है करुणामयी, लेकिन पिछले दिनों सोशल मीडिया पर भी बच्चों के नाम पर ऐसे मैसेज चल रहे थे। नये बच्चों के नाम पर मजाक में जो नाम चल रहे थे, वे इस तरह से थे, सेनेटाइजर सिंह, मास्क आहूजा, क्वारंटाइन कपूर आदि।

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