सार्क देशों का बने आपात कोष : मोदी
नयी दिल्ली, 15 मार्च (एजेंसी)
दक्षिण एशियाई देशों के संगठन (सार्क) के साथ ई-बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिये संयुक्त रणनीति अपनाने की वकालत की। आपात कोष सृजित करने का प्रस्ताव देते हुए उन्होंने कहा कि भारत इसके लिये 1 करोड़ डॉलर की प्रारंभिक पेशकश से शुरुआत कर सकता है। इस आपात मौके पर भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वास्थ्य मामलों पर विशेष सहायक जफर मिर्जा ने कहा कि कोरोना के खतरे से निपटने के लिये जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों को हटा लेना चाहिए। गौर हो कि भारत कहता आया है कि कश्मीर उसका ‘आंतरिक मामला’ है। पाकिस्तान सच्चाई को स्वीकार करे और भारत विरोधी बयानबाजी को रोके।
वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सार्क देशों के साथ बातचीत में मोदी ने कहा, ‘हमने रोग निगरानी पोर्टल बनाया है, सार्क देशों के साथ रोग निगरानी साफ्टवेयर साझा कर सकते हैं।’ मोदी ने कहा, ‘हमें सतर्क रहने की जरूरत है। तैयार रहें लेकिन घबराएं नहीं..यही हमारा मंत्र है।’ मोदी ने कहा कि भारत ने कोरोना वायरस प्रभावित देशों से अपने पड़ोसी देशों के कुछ नागरिकों को भी बाहर निकालने में मदद की। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भी शामिल हुए। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा, ‘मैं दक्षेस मंत्रिस्तरीय समूह के गठन का प्रस्ताव करता हूं।’ उन्होंने सहायता की पेशकश पर प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया।
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मोदी के सुझाव का स्वागत करते हुए टेली-मेडिसिन का एक साझा नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव दिया। मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा कि कोई भी देश इस हालात से अकेले नहीं निपट सकता। नेपाल के पीएम ओली ने सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई। भूटान के पीएम ने कहा, ‘हम सभी साथ आएं।’ उधर, पाकिस्तान के पीएम के विशेष सहायक मिर्जा ने कहा कि वर्तमान हालात से निपटने के लिये कोई भी देश मुंह नहीं मोड़ सकता है।
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