नयी दिल्ली, 9 फरवरी (एजेंसी)
नियुक्ति और पदोन्नति में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि राज्य सरकारें आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं हैं और ऐसा कोई मूल अधिकार नहीं है जिसके तहत कोई व्यक्ति पदोन्नति में आरक्षण का दावा करे। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘अदालत राज्य सरकार को आरक्षण उपलब्ध कराने का निर्देश देने के लिए कोई परमादेश नहीं जारी कर सकती।’
उत्तराखंड सरकार के 5 सितंबर 2012 के फैसले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी की। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण उपलब्ध कराये बगैर सार्वजनिक सेवाओं में सभी पदों को भरे जाने का फैसला लिया था। सरकार के फैसले को उत्तराखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसने इस फैसले को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, ‘यह निर्धारित कानून है कि राज्य सरकार को सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियों के लिए आरक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश नहीं दिये जा सकते। इसी तरह सरकार पदोन्नति के मामलों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है।’ पीठ ने कहा, ‘हालांकि अगर वे (राज्य) अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं और पदोन्नति में आरक्षण देने का प्रावधान करते हैं तो सबसे पहले उसे इस तरह के आंकड़े इकट्ठे करने होंगे, जिससे यह स्पष्ट होता हो कि सार्वजनिक पदों पर किसी विशेष वर्ग का प्रतिनिधित्व कम है।’
उत्तराखंड सरकार की सितंबर 2012 की अधिसूचना को बरकरार रखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट को राज्य के फैसले को अवैध नहीं घोषित करना चाहिए था। आरक्षण के बारे में संवैधानिक प्रावधान का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा, ‘यह राज्य सरकार को तय करना है कि सरकारी पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति के मामले में आरक्षण की आवश्यकता है या नहीं।’
संसद के भीतर और बाहर उठाएंगे मुद्दा : कांग्रेस
नयी दिल्ली (एजेंसी) : कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असहमति जतायी। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति समुदायों के अधिकार खतरे में हैं। कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में कहा कि पार्टी इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह उठाएगी। वासनिक ने कहा, ‘हम सम्मानपूर्वक कहते हैं कि हम इस निर्णय से सहमत नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि सरकारी पदों पर एससी/एसटी समुदाय के लोगों की नियुक्ति सरकारों के विवेकाधिकार पर नहीं होनी चाहिए, यह संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार है।’ कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने कहा कि यह विषय भाजपा नीत केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विरोधाभास को प्रदर्शित करता है, क्योंकि केंद्र ने इसी तरह के मामले में पदोन्नति में आरक्षण का समर्थन किया था। उन्हाेंने कहा, ‘भाजपा बुनियादी तौर पर दलितों और आरक्षण के खिलाफ है।’
लोजपा ने जतायी असहमति
भाजपा के सहयोगी दल लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने ट्वीट किया, ‘लोजपा सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से सहमत नहीं है। पार्टी की मांग है कि केंद्र सरकार अभी तक की तरह ही नौकरी और पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कदम उठाए।’ लोजपा के संस्थापक एवं केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान अनुसूचित जाति और जनजाति के सांसदों के साथ सोमवार को होने वाली बैठक में यह मुद्दा उठा सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने राज्यसभा और लोकसभा के अजा/अजजा सदस्यों को 10 फरवरी को अपने निवास पर आमंत्रित किया है।’

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