सौरभ मलिक/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 1 जनवरी
कुछ दिनों के शीतकालीन अवकाश के बाद बुधवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में फिर कामकाज शुरू हो गया। हाईकोर्ट में पांच लाख से अधिक केस लंबित हैं जहां 30 जजों के पद रिक्त हैं। ऐसी ही स्थिति रही तो इन मामलों को निपटाने में 50 से भी अधिक साल लग सकते है। लंबित मामलों को चिन्हित करने, उन्हें कम करने के लिए बने नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड ने यह इंगित किया है कि हाईकोर्ट में 528340 मामले फैसले के इंतजार में हैं। इनमें से 380937 एक साल पुराने हैं, जबकि 80026 केस 10 से 20 साल पुराने हैं और 6729 मामले 20 से 30 साल तक पुराने हैं।
कोर्ट में लगातार केसों की संख्या बढ रही है। हालांकि तथ्यों एवं सबूतों के अभाव में अनेक मामलों को निपटा दिया जाता है। हाईकोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल नवंबर में 12286 में से 11860 मामलों का निपटारा कर दिया गया। विदेशी कैदियों के मामले में स्वत: संज्ञान वाला एक केस 2016 से लंबित है। पिछले साल इसे तीन बार महज सूचीबद्ध किया गया था।
एक केस 40 साल पुराना : संभवत सबसे पुराना मामला, भूमि मामले में सोहन सिंह के खिलाफ रछपाल सिंह द्वारा दायर अपील है। गुरदासपुर क्षेत्र में अपील दायर किए जाने के चालीस साल बाद, मामला अब भी लंबित है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड से पता चलता है कि यह मामला पिछले साल केवल सात बार सुनवाई के लिए आया था और फरवरी के लिए लंबित है।

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