चेन्नई, 1 जून (एजेंसी)
केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत कर दी है, लेकिन दक्षिण भारत में यह चर्चा तेज हो गई है कि इस क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। विशेष रूप से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की मंत्रिमंडल में अनदेखी की गई।
कर्नाटक से निर्मला सीतारमण के अलावा 3 केंद्रीय मंत्री बनाए गए हैं, जबकि केरल और तेलंगाना से एक-एक मंत्री हैं। कर्नाटक से राज्यसभा सांसद निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय मिला है। तमिलनाडु के खाते में एक भी मंत्री पद नहीं गया। 2009 में संप्रग-2 सरकार में तमिलनाडु से 9 मंत्री थे। भाजपा को इस बार राज्य में एक भी सीट नहीं मिली, जबकि उसके सहयोगी अन्नाद्रमुक ने एक (थेनी) सीट जीती है और बाकी 37 लोकसभा सीट द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन के खाते में गयीं। द्रमुक प्रमुख एम के स्टालिन ने कहा कि पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल में तमिलनाडु के किसी प्रतिनिधि को जगह न देकर राज्य की ‘उपेक्षा’ की है, क्योंकि वह इस बात से नाराज हैं कि लोगों ने उनकी पार्टी के एक भी उम्मीदवार को नहीं चुना। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केएस अलागिरी ने कहा कि इसे केवल अनाद्रमुक का बहिष्कार ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु का भी बहिष्कार माना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगया कि तमिलनाडु की उपेक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर का तमिल लोगों से कोई संबंध नहीं है और उन्हें तमिलनाडु का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।

The post मोदी मंत्रिमंडल में ‘दक्षिण की उपेक्षा’ पर उठे सवाल appeared first on दैनिक ट्रिब्यून.



from दैनिक ट्रिब्यून http://bit.ly/2WB5w1h
via Latest News in Hindi

0 Comments