मौसमी सब्जियों के दाम गिरने से किसानों की कमर टूटी
होशियारपुर, 2 जून (निस)
मौसमी सब्जियों के दामों में आई रिकार्डतोड़ गिरावट ने पहले ही अर्थिक तौर पर टूटकर अत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। हालांकि, इसका लाभ उपभोक्ता को भी नहीं मिल पा रहा, लेकिन सब्जी के परचून विक्रेता चांदी कूट कर अपनी झोली भर रहे हैं। रविवार को जिले की मुख्य सब्जी मंडी में सुबह मौसमी सब्जियां बेचने आए किसान उचित दाम न मिलने के कारण खासा परेशान दिख रहे थे और न चाहते हुए भी सब्जियों को बेच कर अपनी किस्मत को कोस रहे थे।
मंडी में थोक में भिंडी 10 रुपए से 12 रुपए , घीया, कद्दू 2 रुपए किलो, खीरा, करेला, शिमला मिर्च 8 से 10 रुपए, टमाटर 10 से 15 रुपए, तरबूज व खरबूजा 2 से 4 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा था। आलू 50 किलो के बोरे का दाम 200 से 250 रुपए के आसपास बताया गया, जबकि परचून में कोई भी सब्जी 20 रुपए किलो से कम दाम में नहीं मिलती।
मंडी में अपनी सब्जियां बेचने आए किसानों मास्टर ओंकार सिंह, अमरजीत सिंह मुख्लियाना, हरजिंदर सिंह अधिकारे परमजीत सिंह धुग्गा, कुश कुमार बेलीपुर आदि ने बताया कि उन्हें इस मौसम की सब्जियों को बीजने से लेकर मंडी में लाने तक लिए खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि महंगे दाम पर हाइब्रिड बीज लेकर वे पहले सब्जियों को बोते हैं। इसके बाद कीड़ों से बचाने के लिए मंहगी दवाइयों खाद का प्रयोग करते हैं। तीन महीने में खेतों में खासी मेहनत कर इन्हें तैयार करने पर एक खेत पर करीब 50 से 60 हजार रुपए तक का खर्चा आ जाता है। लेकिन इस समय जो दाम उन्हें मिल रहे हैं, उससे तो सब्जियों को तोड़ कर मंडी में लाने तक का खर्च भी पूरा नहीं होता। उन्होंने कहा कि उनकी मंडियों में आकर बिकने वाली फसलों से मंडी बोर्ड को अरबों रुपए की कमाई होती है। किसानों ने मांग की है सरकार व मंडी बोर्ड को मंडी के नजदीक एक आधुनिक ढंग का कोल्ड स्टोर बनाना चाहिए ताकि जब भी सब्जियों के दाम गिरें तो उन्हे कोल्ड स्टोर में रखा जा सके।
क्या कहते हैं सब्जी मंडी के आढ़ती
जब इस संबंधी न्यू सब्जी मंडी के प्रधान कुलबंत सिंह काला, महासचिव राजेश कुमार बबली, कुलविंदर सिंह सचदेवा, राम कुमार ने बताया कि मौसम में ज्यादा गर्मी होने के कारण मौसमी सब्जियां एकदम पक कर मंडी में पंहुच गई हैं। जो सब्जी बिकने से रह जाएगी उसे फेंकना पड़ता है, इसलिए न चाहते हुए भी उन्हें हर हाल में बिकने के लिए मंडी में आई सब्जियों को बेचना ही पड़ता है।
क्या कहते हैं सचिव मार्केट कमेटी
जब इस संबंधी मार्केट कमेटी के सचिव विक्रमजीत सिंह व लेखाकार राजिंदर सिंह केसर से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मौसम में ज्यादा गर्मी होने के कारण गर्मी के मौसम की सब्जियां एक साथ पक कर तैयार हो गई हैं जिसके चलते मंडियों में सब्जी की आमद बढ़ गई है। किसानों को इसे खेत में रोकना मुश्किल है, इसी तरह दुकानदार भी ज्यादा मात्रा में खरीददारी नहीं करते। जो सब्जी बिकने से रह जाती है, उसे फेंकना पड़ता है।
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