पेटूमल
बाल कविता
डींग हांकते पेटूमल,
हैं हिसाब में वे अव्वल।
जितने भी हों प्रश्न कठिन,
कभी न हल हों उनके बिन।
एक बार टेसूजी आए,
उनके लिए प्रश्न थे लाए।
पहुंचे फिर पेटू के घर,
कहा — ज़रा इनको हल कर।
पेटू बोले हंस के ज़रा,
इनमें क्या है अरे धरा?
मिनट लगेंगे केवल चार,
अभी किए देता हल यार।
लेकिन जब दिन बीत चला,
और न कोई हल निकला।
बोले — आ जाना कल ही,
आज नहीं है मूड सही।
डाॅ. घमंडीलाल अग्रवाल
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