मोदी के लेह दौरे के गहरे निहितार्थ

आपराधिक मंसूबों से पूरी दुनिया को गहरे कोरोना संकट में धकेलकर अपनी विस्तारवादी नीति से पड़ोसी देशों को आतंकित करने वाले चीन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेह के अग्रिम मोर्चे पर पहुंचकर करारा संदेश दिया है कि विस्तारवाद की नीतियों का दौर चला गया। साम्राज्यवादी ताकतों ने पिछली सदी में मानवता को नुकसान पहुंचाया है। विस्तारवादी मंसूबे पालने वाले भुला दिये गये हैं और उन्हें शांतिप्रिय दुनिया के सामने झुकना पड़ा है। यह विकासवाद का युग है। चीन को नसीहत देते हुए स्पष्ट कर दिया कि बांसुरीधारी श्रीकृष्ण की पूजा करने वाले देश में उनके सुदर्शन चक्रधारी रूप को भी पूजा जाता है। साथ ही बड़ी बुद्धमत की आबादी वाले चीन को यह भी समझा दिया कि गौतम बुद्ध ने साहस का मतलब प्रतिबद्धता बताया था। साहस करुणा है। साहस के मायने हैं कि हम निर्भीक-अडिग होकर सत्य के पक्ष में खड़े रहें। निस्संदेह उनके शब्दबाण ने चीन के मर्म पर चोट की है। तभी चीनी विदेश मंत्रालय को कहना पड़ा कि बातचीत से रास्ता निकालने की कोशिश होनी चाहिए। चीन अपने पड़ोसियों को मनोवैज्ञानिक दबाव में डालकर अपने मंसूबे पूरा करना चाहता है। गलवान की घटना की देशव्यापी प्रतिक्रिया ने चीन को अहसास करा दिया है कि उसने एक भरोसेमंद पड़ोसी और व्यापार की संभावनाओं को खोया है। निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी के अचानक दौरे से बेहद विषम परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा में जुटे सैनिकों का मनोबल बढ़ा है। अपने ओजस्वी संबोधन से वे हर वर्ग के लोगों में उत्साह भरते हैं, फिर जवानों के लिए तो उनके शब्द ओज व वीरता के परिचायक होते हैं। रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां ‘जिनके सिंहनाद से सहमी, धरती रही अभी तक डोल, कलम आज उनकी जय बोल’ निस्संदेह सैनिकों का मनोबल बढ़ाएगी। साथ ही वीर भोग्या वसुंधरा का संदेश कि वीर अपने शस्त्र की शक्ति से ही मातृभूमि की रक्षा करते हैं।
दूसरी ओर, भारत ने हाल ही में जमीन से आसमान तक अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश के क्रम में बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी देकर अपनी रक्षा तैयारियों को पुख्ता करने का प्रयास किया है। कोशिश है कि यदि युद्ध जैसी स्थिति पैदा होती है तो उसका मुकाबला किया जा सके। वीरता को शांति की पूर्व शर्त बताते हुए प्रधानमंत्री ने रक्षा तैयारियों के निहितार्थ भी दुनिया को बताये। उन्होंने कहा कि आज यदि भारत जल, थल, नभ व अंतरिक्ष में अपनी ताकत को बढ़ा रहा है तो उसके पीछ का लक्ष्य मानव कल्याण ही है। विश्व युद्ध हो या शांतिकाल, दुनिया ने भारत के वीरों का पराक्रम देखा है। हमारी प्राथमिकता मानवता की रक्षा रही है। रक्षा-सुरक्षा का हमारा सामर्थ्य और संकल्प हिमालय जैसा ऊंचा है। इस दौरे के दौरान गलवान में चीन सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देने वाले 14 कोर की जांबाजी को सराहने के साथ मोदी ने घायल सैनिकों से मुलाकात करके उनका उत्साहवर्धन भी किया। चीन सीमा पर तनाव के बीच जारी इन घटनाक्रमों पर पूरी दुनिया की नजर है। खासकर नीमू में अग्रिम मोर्चे पर गलवान घटनाक्रम के 18 दिन बाद प्रधानमंत्री की सक्रियता के तत्काल बाद चीन की प्रतिक्रिया को इसी क्रम में देखा जाना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय जगत चीन की दादागीरी को गंभीरता से देख रहा है। बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा भी कि भारत के साथ सीमा पर चीन की आक्रामकता चीन के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है। चीन की यह आक्रामकता केवल भारत के साथ ही नहीं बल्कि कई देशों के साथ है। इससे चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी का असली चेहरा बेनकाब होता है। हांगकांग के मुद्दे पर अमेरिका, ब्रिटेन व अन्य यूरोपीय देश चीन से खफा हैं। उन्हें चिंता है कि अब हांगकांग की स्वायत्तता खतरे में पड़ जायेगी। अब चाहे दक्षिण चीन सागर में चीनी आक्रामकता हो, ताइवान से टकराव या फिर वीगर मुसलमानों का दमन, विश्व जनमत चीन के खिलाफ खड़ा होता जा रहा है।

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