मिशन 6जी – समय है अगुवाई का
प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत का आह्वान कर रहे हैं, जिसकी कई तरह से व्याख्या हो सकती है। इसकी एक दिशा 6जी भी है। इस दिशा में बढ़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए।
अगुवाई का समय : जैसा कि किसी भी राष्ट्रीय स्तर के सामरिक महत्व वाले उद्यम के साथ होता है, भारत में 6जी नेटवर्क स्थापित करने के विचार को पहले-पहल राजनीतिक नेतृत्व और तकनीकी माहिरों से समर्थन मिलने की जरूरत है। हमारे पास अपनी महारत और आत्मविश्वास के बूते स्थापित किए अंतरिक्ष एवं परमाणु कार्यक्रम हैं। अब हमारा अगला ध्येय स्वदेशी 6जी नेटवर्क होना चाहिए, जिसके लिए पूर्ण समर्पण चाहिए होगा। बौद्धिक संपदा में श्रेष्ठता प्राप्त करने को नजरअंदाज कर भारत आत्मनिर्भर नहीं बन सकता। समग्र आत्मनिर्भरता बनाने हेतु भारत को अलग-अलग क्षेत्रों में धन लगाना होगा, यहां निवेश दूरसंचार का एक अग्रणी योग्य पात्र है। 6जी की क्रांतिकारी योजना देश में डिजिटल एवं मल्टी-ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में उत्प्रेरक का काम कर सकती है।
स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक, अभिनव खोज आधारित नव-उद्यमों को बढ़ावा, भारत की डिजिटलीकरण समर्था बनाने हेतु प्रणाली का विकास और इसका क्रियान्वयन जरूरी है। 6जी क्षमता बनाने के लिए हमें अपने युवाओं को इस क्षेत्र से जुड़ी शिक्षा पाने और अन्वेषणपरक व्यवसायों को चुनने के लिए उत्साहित करना होगा। अगर हम भारत को बतौर एक डिजिटलीकृत अर्थव्यवस्था में परिवर्तित कर पाए तो यह समृद्धि की फसल काटने में काफी सहायक होगा। सामरिक महत्व की यह प्राप्ति अर्थव्यवस्था, तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तमाम अवयवों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी। अन्य उपकरण न केवल मोबाइल फोन बल्कि हरेक मशीन, गाड़ी और व्यक्ति, सबको 5जी से भी 1000 गुणा तेज बैंडविड्थ वाला संचार माध्यम मिल जाएगा। वे एप्लिकेशंस जो 4जी या 5जी नेटवर्क की कमी होने की वजह से आज पूरी क्षमता से काम नहीं कर पातीं, वह सब आम उपभोक्ता से लेकर छोटे-बड़े व्यवसायी तक के लिए उपयोगी हो जाएंगी, इससे देश में और ज्यादा खुशहाली आएगी। अन्यथा हम बाकी दुनिया में प्रचलित तकनीक को अपनाने में वर्षों का समय लेते रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर अनुसंधान एवं विकास हेतु तालमेल कर हम नई तकनीक में अगुवा बनंे, जिससे भारत का रुतबा बढ़ेगा। 6जी को वास्तविकता बनाने के लिए दूरसंचार एवं गणना (कम्यूटिंग) क्षेत्र के अग्रणी खिलाड़ियों और समान विचारधारा वाले गणतंत्रों से गठबंधन करने का यह उचित समय है।
बुनियादी तंत्र के सुचारु परिचालन में जब कभी भी कोई व्यवधान उत्पन्न होता है तो वास्तव में यह उसका तोड़ निकालने हेतु बीज बोने का मौका होता है। विगत में हम दूरसंचार ढांचे का विकास करने में केवल निचले स्तर के पायदानों पर चढ़ते आए हैं, उस परिपाटी को बदलना होगा। डिजिटल विकास का मूल्यांकन दूरसंचार-टॉवरों की गिनती, मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या, डाटा-इस्तेमाल की मात्रा अथवा कमाई में हुई बढ़ोतरी से न करके एप्लिकेशन्स की जटिलता, कितनी संख्या में इस्तेमाल हो रही हैं अथवा ऐसी सेवा-नीत सुविधाएं जो भविष्य की अर्थव्यवस्था में गुणात्मक वृद्धि कर पाएं, उससे किया जाना चाहिए।
बहुउद्देशीय सर्वव्यापी नागरिक उपकरण : कृत्रिम-बुद्धि और बहु-सेंसर से लैस भविष्य के 6जी मोबाइल उपभोक्ता-सेवाओं का संयुक्त स्वरूप होंगे। यह उपभोक्ता को अनेकानेक आवश्यक सूचनाएं प्रदान करेंगे। मसलन, निजी स्वास्थ्य संबंधी सूचकांक, हवा में मौजूद सूक्ष्म-प्रदूषण कण और विषैले तत्व, भोजन-गुणवत्ता या फिर घर में रहकर फोन एवं अन्य उपकरण-प्रणाली के जरिए काम करने की सुविधा या फिर मोबाइल गेम खेलते वक्त एकदम वास्तविकता जैसा आभासीय अनुभव देंगे। भारत में हम सहज उपयोगी उपकरणों की उम्मीद कर सकते हैं, जिनमें व्यापक डिजिटल क्षमता होगी। ये उपकरण स्वास्थ्य कर्मियों, शिक्षकों और कृषि-तकनीशियनों को ग्रामीण परिवेश में गुणात्मक सुधार करने की क्षमता प्रदान करेंगे, जिससे कि गांवों में डॉक्टर-प्रोफेसर-कृषि माहिरों को शारीरिक रूप से मौजूद होने की जरूरत सीमित या नगण्य रह जाएगी।
पर्यावरणीय संसाधनों का खाका बनाना और व्यापक डाटा संग्रहण : अनुसंधान यह भी बताते हैं कि भावी उपकरण और फोन भूमि, जल और भूमिगत स्रोतों की जानकारी इतने सुस्पष्ट रूप में मुहैया करवा सकेंगे जो इससे पहले संभव नहीं थी। उपभोक्ता को सामान्य फोन क्रियाकलापों की सुविधा देने के अलावा 6जी फोन चौबीसों घंटे बतौर एक सेंसर और डाटा संग्रहक एवं गणक की भूमिका भी निभाएंगे, जो राष्ट्रीय स्तर के सूचना संग्रहण पोर्टल से जुड़कर किसानों, मौसम विभाग और क्षेत्रीय कर्मियों को वास्तविक समय में नवीनतम सूचना और जानकारी मुहैया करवाएंगे।
सूक्ष्म पहचान एवं जनपरिवहन का सटीक समन्वय : भावी 6जी मोबाइल फोन-उपकरण-तंत्र किसी वाहन की तात्कालिक स्थिति को एक सेंटीमीटर की सटीकता से बताने में समर्थ होंगे, जिससे कि हम वास्तविक समय में वह कहां है, इसे जान जाएंगे। भारत के लिए इस तरह की क्षमता पाने से स्रोतों की भारी कमी झेल रही रेल, हवाई और सड़क परिवहन व्यवस्थाओं को कहीं ज्यादा सुचारु जन-परिवहन तंत्र में तब्दील किया जा सकता है। कृत्रिम-बुद्धि और समांतर बृहद गणना तंत्र से परिवहन परिचालन और समयसारिणी में साम्य बैठाने में मौजूद समस्याओं से पार पाने में मदद मिलेगी।
तीन आवश्यक अवयव : प्रथम, ये प्रयास आवश्यक रूप से तभी संभव है जब सरकार कृत्रिम-बुद्धि अनुसंधान, आवश्यक सामग्री, रेडियो आवृत्ति बैंड, जैव-विज्ञान, गणना-विज्ञान और दूरसंचार में नए क्षेत्र तलाशने में प्रयास शुरू करें। दूसरा, इस राष्ट्रीय मिशन के प्रबंधन के लिए मौजूदा सरकारी ढर्रे से परे हटकर व्यवस्था बनानी होगी, ऐसे नियम बनाने होंगे, जिससे कि मौजूदा सरकारी नियंत्रण और खरीद नीति वाले तंत्र से इतर नव-उद्यमियों की ऊर्जा-अभियान प्रबंधन क्षमता-स्रोत परिचालन प्रणाली का काम अबाध हो सके। मिशन 6जी के लिए दुनियाभर के श्रेष्ठ दिमागों को अच्छा मेहनताना देकर अनुसंधान एवं विकास के काम में जोड़ा जा सकता है। तीसरा, इस विशाल परियोजना के लिए धन का इंतजाम उस ढंग से नहीं चलेगा, जिस तरह कि सरकार द्वारा योजनाओं के लिए आमतौर पर जुगाड़ कर किसी तरह आधा-अधूरा फंड रख दिया जाता है। इसके विपरीत यह बहुत ऊपर का मामला होगा, क्योंकि केवल परिकल्पना के आरंभिक प्रतिमान और वास्तु-ढांचा स्थापित करने में ही अरबों डॉलरों का खर्च हो जाएगा।
कैसे होगा संभव :
n इसके लिए दीर्घकालिक दृष्टि-पत्र, बहु-वर्षीय योजना, ठोस धन निवेश का इंतजाम, न्यूनतम अफसरशाही रखने की घोषणा की जाए। नई तकनीकी पहल वाली यह परियोजनाएं (6जी दूरसंचार प्रणाली, कृत्रिम-बुद्धि, क्वांटम कम्यूटिंग इत्यादि) को सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत ठीक वैसे परिचालित किया जाये, जिस तरह पहले से अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रमों के मामले में किया जा रहा है।
n जैसा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय द्वारा पेश किए गए ‘भारतीय खरब डॉलर डिजीटल अवसर निर्माण दस्तावेज-2019’ में दर्शाया गया है, के अनुसार नई इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन नीति को क्रियान्वन में लाया जाए।
n भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार की बदौलत गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक कंपनियों को अपनी सरदारी कायम रखवाने में मदद करने की बजाय हमें प्रतिभा-तकनीक-आत्मविश्वास की ठोस नींव पर भारतीय अभिनव तकनीक विकसित करते हुए खुद का पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा।
जिस तरह हमने स्वावलंबन और आत्मविश्वास से अपने अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रमों में सफलता पाई है, 6जी के मामले में उसे दोहरा कर आत्मनिर्भरता पानी होगी। बेहतर विश्व के लिए तकनीकी अगुवा बनना हमारे अपने और दुनिया के लिए तोहफा होगा। यह प्राप्ति वर्ष 2047 का जश्न मनाने के लिए सबसे बढ़िया तरीका होगा, जब हम आज़ादी की 100वीं वर्षगांठ मना रहे होंगे।
भविष्य की लड़ाइयों में 6जी की भूमिका क्या रहेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका क्या असर रहेगा, इस पर फिर कभी…
लेखक पश्चिमी सैन्य कमान के पूर्व कमांडर और पुणे इंटरनेशनल सेंटर के संस्थापक सदस्य हैं।
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