जवाबदेही के लिए पाक पर बनायें दबाव
अस्तित्व में आने के बाद से ही पाकिस्तान भारत विरोधी कृत्यों में लिप्त रहा है। गाहे-बगाहे उसकी करतूतें सामने आती रहती हैं। आज जब अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत कूटनीतिक व सैन्य ताकत के रूप में और मजबूत हुआ है तो पाक ने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए चोर रास्ता चुना है। सीमा पर भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता से घुसपैठ व हथियारों की आपूर्ति न कर पाने पर वह नशीले पदार्थों को भारत भेजकर आतंकियों को हथियार व पैसा उपलब्ध करा रहा है। बीते रविवार रावी नदी में तैरती पकड़ी गई 65 किलोग्राम हेरोइन पाक के खतरनाक मंसूबों की कहानी कहती है। यह भी कि भारत में नशे का ज़हर भेजने के लिए पाक कैसे-कैसे तरीके अपना रहा है। पिछले दिनों पंजाब में ड्रोन के जरिये हथियार व नशीले पदार्थ भेजने के मामले उजागर हुए। विडंबना यह है कि इस साजिश में पाक की एजेंसियों ने भारत के नशे के सौदागरों को प्रलोभन देकर साथ देने को मना लिया है। बीते वर्ष जून में अटारी बॉर्डर चैक पोस्ट पर पांच सौ किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। इतनी बड़ी नशे की खेप पाकिस्तान की आधिकारिक एजेंसियों की भागीदारी के बिना भारत में दाखिल नहीं हो सकती है। कह सकते हैं कि पाक के सत्ता प्रतिष्ठानों की शह के बिना यह संभव नहीं था। यह खुला रहस्य है कि हनीट्रैप व प्रलोभनों के जरिये कुछ भारतीयों को इस साजिश में शामिल कर लिया जाता है, जिनके जरिये नशे की खेप जम्मू-कश्मीर के आतंकी संगठनों तक पहुंचायी जा रही है। हाल ही में पंजाब पुलिस ने नशे और हथियारों की तस्करी के रैकेट का पर्दाफाश करके एक बीएसएफ कर्मी और कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। अब इस मामले में एक सैनिक समेत चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इसके बावजूद वह पहले से ही आतंकवादी संगठनों को सहायता पहुंचाने की निगरानी करने वाली अतंर्राष्ट्रीय संस्था एफएटीएफ के रडार पर है।  आतंकी संगठनों को वित्तपोषण के गंभीर आरोपों के चलते उसे फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स द्वारा ग्रे सूची में रखा गया है। उसकी ऐसी हरकतें जारी रही तो उसे काली सूची में डाला जा सकता है। दरअसल, आतंकवाद प्रश्रय की संकीर्ण व्याख्या के चलते और चीन जैसे उसके मित्रों की मदद से ऐसा नहीं हो पाया है। अन्यथा पाकिस्तान के बड़े आतंकी संगठनों के सरगना पहले ही कुख्यात  आतंकियों की सूची में शामिल हो चुके हैं। यदि पाक की हरकतों की ईमानदारी से जांच हो तो उसे काली सूची में शामिल होने में देर नहीं लगेगी। भारत के खिलाफ नार्को-टेरर हथियार की तरह इस्तेमाल करना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति का हिस्सा रहा है। पंजाब के काले दौर में चरमपंथी संगठनों को पैसा और हथियार उपलब्ध कराने में भी पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई का बड़ी भूमिका रही है। इसके अलावा कई उदाहरण सामने आये जब साबित हुआ है कि जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई अशांत इलाकों में आतंकवादी समूहों की गतिविधियां सीमा पार से लाये गये नशे के सामान की बिक्री से जुटाये गये पैसे से संचालित होती रही हैं। इस दिशा में देश के खुफिया तंत्र को गंभीरता से पड़ताल करने की जरूरत है। इसके जरिये जहां आतंकवाद को सींचा जा रहा है, वहीं नई पीढ़ी को नशे की दलदल में धकेलने की भी साजिश की जा रही है। पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में नशे की बढ़ती खपत सामाजिक दृष्टि और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी घातक है। साथ ही हथियारों की आपूर्ति से हिंसा व आतंकवाद को प्रश्रय मिलता है जो देश की कानून व्यवस्था के लिए भी संकट पैदा करता है। ऐसे में केंद्र व राज्यों को मिलकर इस खतरनाक खेल का मुकाबला करना चाहिए। भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति व एफएटीएफ के जरिये पाक पर दबाव बनाना चाहिए।

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