जन संसद

तंत्र विकसित करें
ट्रेनों में चिकित्सा सुविधा के बिना रेल यात्रा को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। लॉकडॉउन के समय श्रमिकों के लिए स्पेशल ट्रेनों में यदि भोजन-पानी और चिकित्सा जैसी जीवनोपयोगी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था रेलवे प्रबंधन द्वारा की गई होती तो समस्या विकट न होती। महिलाओं को असहनीय पीड़ा न सहनी पड़ती व मृतक यात्रियों की जान को बचाया जा सकता था। रेलवे अस्पतालों, टीटी, स्टेशन मास्टर व रेल सेवा के आपातकाल नंबर को नेटवर्क से जोड़कर जरूरतमंद यात्रियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है, जिससे यात्रा सुरक्षित हो सके।
देवी दयाल दिसोदिया, फरीदाबाद
अनुत्तरित प्रश्न
लम्बी दूरी की ट्रेनों में चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था होना अति आवश्यक है। जहां तक बच्चों के जन्म का प्रश्न है जो महिलाएं परिश्रम का काम करती हैं उनके लिए यह प्रक्रिया कम जटिल सामान्य ढंग से प्राकृतिक रूप में सम्पन्न हो जाती हैं। जबकि परिश्रम न करने वाली औरतों में ऐसी संभावना बहुत कम होती है, जिसकी परिणति आज सिजेरियन का रूप ले चुकी है। लाॅकडाउन में श्रमिक ट्रेनों में श्रमिक महिलाओं द्वारा 36 बच्चों को जन्म देना भी ऐसी ही सामान्य प्राकृतिक घटना थी जो कि अपने पीछे कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ गई ।
एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र
संक्रमण रुकेगा
मरीजों की सुविधा के लिए ट्रेनों, रेलवे स्टेशनों पर विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में रोगी को समय से चिकित्सा मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके। स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होनी चाहिए। यात्रियों को मुफ्त दवाइयों की सुविधाएं भी मिलनी चाहिए, क्योंकि कोरोना काल में प्रवासियों का समय से इलाज नहीं हो पाया तो उनको ढूंढ़ना ज्यादा मुश्किल काम है। इसलिए सरकार को उनका यात्रा के दौरान ही इलाज उपलब्ध कराना चाहिए। वरना ऐसी स्थिति में कोरोना फैलने का डर है। ट्रेनों में अस्पताल जैसी आवश्यक सुविधाएं हों। ऐसे में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सुविधाएं मिलेंगी तो स्थिति भी सामान्य रहेगी।
फिआज़ा गौर, पंजाब
संवेदनशीलता जरूरी
कोरोना काल में श्रमिकों के लिए चलाई गईं स्पेशल ट्रेनें समय से अपने गंतव्य तक नहीं पहुंची। इन ट्रेनों में यात्रियों को खाने, पीने तथा चिकित्सा संबंधी सुविधाओं का भी अभाव रहा, जो कुछ यात्रियों की मृत्यु का कारण बना। वहीं 36 बच्चों ने बिना चिकित्सा सुविधा के जन्म भी लिया। अफसोस! लंबी दूरी की इन ट्रेनों में आवश्यक मेडिकल सुविधाओं का सर्वथा अभाव रहा। ऐसे समय में इमरजेंसी मेडिकल सुविधाएं तथा डॉक्टर सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध होनी चाहिए।
शामलाल कौशल, रोहतक
नयी लीक बने
आज भी हम मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। चाहे शिक्षा हो, चिकित्सा या फिर रोजगार। लेकिन इनमें चिकित्सा क्षेत्र का तो बहुत बुरा हाल है। देश में प्रतिदिन हज़ारों की संख्या में ट्रेनें चलती हैं, लेकिन किसी भी साधारण या मेल ट्रेन में कोई चिकित्सक नहीं देखा। कम से कम हर स्टेशन पर तो चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो ही सकती है। ट्रेन में जब भी कोई गर्भवती महिला सफर करे तो उसकी सूचना रेलवे स्टेशन मास्टर को देनी चाहिए या टिकट बुक करवाते समय उसमें इस बात की जानकारी का कॉलम अलग से होना चाहिए ताकि उचित समय पर उचित चिकित्सा उपलब्ध हो सके।
जिनेश कुमार जैन, अम्बाला सिटी
स्थाई इंतजाम हों
देश में बेशक बुलेट ट्रेन चलाने की बात हो रही है, लेकिन रेलवे अभी भी आधुनिकता से बहुत दूर है। इसमें सुविधाओं का अभाव है। फिर भी ट्रेनों में डॉक्टर की सुविधा न होने के कारण गर्भवती महिलाओं को जो असुविधा होती है, वह सरकार और रेलवे विभाग के लिए बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय है। जब रेलवे अपनी पुलिस फोर्स तैयार कर सकती है, अपने अस्पताल खोल सकती है, फिर क्यों नहीं सरकार और रेलवे कम से कम लंबी दूरी की ट्रेनों में डॉक्टरी सुविधा उपलब्ध करवा सकते हैं।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर

पुरस्कृत पत्र
अनिवार्य व्यवस्था हो
कोरोना काल में श्रमिक ट्रेनों में 36 बच्चों का जन्म वास्तव में चौंकाने वाली बात है। वे मांएं कितनी जटिल परिस्थितियों से गुजरी होंगी, जिन्होंने चलती ट्रेन में बच्चे को जन्म दिया। जब श्रमिकों को ट्रेनों अथवा बसों द्वारा उनके गृह राज्यों में भेजा जाता है तो बाकायदा उनका रजिस्ट्रेशन होता है। उस समय यह ध्यान देना चाहिए था। जो मांएं प्रसव-काल के नजदीक थीं उनके लिए अवश्य ही डॉक्टरी सेवा उपलब्ध कराकर भेजा जाना चाहिए था। किसी के जीवन के साथ खिलवाड़ करना सरासर अन्याय है। जहां हजारों की संख्या में यात्री यात्रा करते हों तथा यात्रा भी लम्बी हो, वहां कोई डॉक्टरी सेवा का नहीं होना, बहुत ही खेदजनक है। डॉक्टरी सेवा का होना बेहद लाजिमी है।
सत्यप्रकाश गुप्ता, बलेवा, गुड़गांव

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