पुस्तकें मिलीं

अरुण नैथानी

भले ही राजीव गांधी को राजनीति विरासत में मिली हो, मगर उन्होंने राजनीतिक जीवन में एक अलग छाप छोड़ी। एक शालीन-सभ्य राजनेता के रूप में उन्होंने अपनी पारी खेली। डॉ. शरद रामदेव की पुस्तक राजीव गांधी : आर्किटेक्ट ऑफ मॉर्डन इंडिया में राजीव गांधी के राजनीति में आने, प्रधानमंत्री के रूप में उनके योगदान व निजी जीवन के प्रसंगों का विवरण है।
पुस्तक : राजीव गांधी : आर्किटेक्ट ऑफ मॉर्डन इंडिया लेखक : डॉ. शरद रामदेव प्रकाशक : सिद्धार्थ मेडिकेयर, चेन्नई पृष्ठ : 126 मूल्य : रु. 450.
हिंदी में पंजाबी मिठास
कनाडा में रहने वाली पंजाबी मूल की कवयित्री दिओल परमजीत की पंजाबी में लिखी कविताओं को हिंदी में निखारा है जाने-माने कथाकार, कवि व अनुवादक सुभाष नीरव ने। परमजीत के तीन कविता संग्रह पंजाबी में प्रकाशित हो चुके हैं। हिंदी के  इस पहले कविता संग्रह में सूक्ष्म और कोमल अहसास मुखरित हुए हैं। रचनाओं में पंजाबी सुगंध बरकरार है।
पुस्तक : हवा में लिखी इबारत रचनाकार : दिओल परमजीत अनुवाद : सुभाष नीरव प्रकाशक : राही प्रकाशन, दिल्ली पृष्ठ : 96 मूल्य : रु. 250.
समरसता के सरोकारों का सृजन
पंजाब के चर्चित उपन्यासकार और एक दर्जन पुस्तकें पाठकों तक पहुंचाने वाले डॉ. अजय शर्मा की समीक्ष्य पुस्तक मोहम्मद जलालुद्दीन नाटक विधा में है। हिंदू व मुस्लिमों के बीच की दूरियां समेटने की ईमानदार कोशिश रचनाकार ने नाटक के जरिये की है। नाटक की विशेषता यह कि परिस्थितियां चरित्र रचती हैं और चरित्र परिस्थितियों को नये आयाम देते हैं।
पुस्तक : मोहम्मद जलालुद्दीन रचनाकार : डॉ. अजय शर्मा प्रकाशक : आस्था प्रकाशन, जालंधर पृष्ठ : 64 मूल्य : रु. 160.
गौरवशाली अतीत के पन्ने
इन्द्रा स्वप्न की पुस्तक ‘भारत के प्रथम गौरव’ में उन महान विभूतियों का उल्लेख है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत में पहली बार विशिष्ट स्थान हासिल किया। इसमें पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू, सरोजनी नायडू, रवीन्द्रनाथ टैगोर, बंकिमचन्द्र चटर्जी, बछेन्द्री पाल, मेजर होशियार सिंह, पी.टी. उषा, डॉ. चंद्रशेखर, लता मंगेशकर, जनरल मानेकशा आदि के संघर्ष, जीवनकाल व योगदान का संक्षिप्त विवरण है।
पुस्तक : भारत के प्रथम गौरव रचनाकार : इन्द्रा स्वप्न प्रकाशक : एस. एन. पब्लिकेशन्स, दिल्ली पृष्ठ : 112 मूल्य : रु. 160.
अंतस के संवेदनशील स्वर
‘कांच का बन्दनवार’, ‘भूमिका जारी है’ और ‘एहसास की जुबान’ रचनाओं के बाद शिक्षाविद् और कवयित्री कमलेश आहूजा का नया काव्य संकलन आया है ‘अगले कदम से पहले’, जिसमें कुल 45 कविताएं जीवन की घनीभूत संवेदनाओं को शब्द देती हैं। विषय हमारे आसपास और हमारे बीच के हैं। रिश्तों की कसक है तो जीवन का उज्ज्वल पक्ष भी है।
पुस्तक : अगले कदम से पहले कवयित्री : कमलेश आहूजा प्रकाशक : आस्था प्रकाशन, जालंधर पृष्ठ : 90 मूल्य : रु. 160.
वैश्वीकरण के आयाम
जब हम वैश्वीकरण की बात करते हैं तो इसके राजनीतिक और आर्थिक पहलू ही नहीं है। बाजार ने अपने पांव पसारने से पहले हमारे समाज को गहरे तक उद्वेलित किया है, जिसमें गरिमामय जीवन मूल्यों का ह्रास हुआ है। हमारा रहन-सहन, खान-पान, आचार-विचार एवं भाषा तक को गहरे तक प्रभावित किया है। इन बदलावों का तार्किक विवेचन पुस्तक के पंद्रह शीर्षकों में हुआ है।
पुस्तक : वैश्वीकरण तथा विविध विमर्श रचनाकार : डॉ. सुनीता शर्मा प्रकाशक : आस्था प्रकाशन, जालंधर पृष्ठ : 128 मूल्य : रु. 260.
सनातन सत्य का विवेचन
साहित्य की विभिन्न विधाओं में सृजन करने वाली संतोष गर्ग की पुस्तक ‘सनातन वार्ता’ आध्यात्मिक मन की जिज्ञासाओं का निराकरण है। सनातन जीवन शैली से जुड़े तमाम सारगर्भित प्रश्नों के जो उत्तर उन्होंने जूना पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरि के मुखारबिंद से प्राप्त किये हैं, उन्हें पुस्तक रूप दिया गया। पुस्तक अनेक सनातन सत्यों से रूबरू कराती है। पुस्तक प्रश्न-उत्तर शैली में है।
पुस्तक : सनातन-वार्ता रचनाकार : संतोष गर्ग प्रकाशक : संतोष प्रकाशन, हिसार पृष्ठ : 116 मूल्य : रु. 100.
मानवीय सरोकारों को शब्द
तन्हाई ग़ज़ल संग्रह प्रो. हरप्रीत का दूसरा प्रयास है, इससे पूर्व उनकी पुस्तक जुस्तजू को पाठकों का अच्छा प्रतिसाद मिला। उनकी रचनाओं में मानव मन की सरल अभिव्यक्ति मुखरित है। उनकी रचनाओं में बदलते परिवेश में रिश्तों की टकराहट है तो दूसरी ओर स्नेह, प्रेम, करुणा, सहानुभूति, विनम्रता व सहजता की अनुभूति को उन्होंने शब्द दिये हैं। वे मानवीय सरोकारों के पक्षधर हैं।
पुस्तक : तन्हाई रचनाकार : प्रो. हरप्रीत सिंह प्रकाशक : प्रीत सदन, लुधियाना पृष्ठ : 104 मूल्य : रु. 150.
संवेदनाओं से भीगे अहसास
एक शिक्षक की लंबी पारी के बावजूद गंगाराम राजी ने साहित्य सृजन में भी अपनी जगह बनायी। उनके एक दर्जन कहानी संग्रह व पांच उपन्यास इस बात के गवाह हैं। समीक्ष्य पुस्तक ‘एक भीगी सुबह’ में उनकी दस कहानियां संगृहीत हैं। वे अपनी कहानियों में आसपास का परिवेश तलाश करके उसे वैचारिक प्रगतिशीलता से तराश देते हैं। जनवादी चेतना कहानियों का प्रबल पक्ष है।
पुस्तक : एक भीगी सुबह कथाकार : गंगाराम राजी प्रकाशक : साहित्य संस्थान, दिल्ली पृष्ठ : 110 मूल्य : रु. 300.
लघुकथा का साझा मंच
प्रो. रूप देवगुण, ज्ञानप्रकाश ‘पीयूष’ और लाजपत राय गर्ग के संपादन और विजय ‘विभोर’ के संयोजन में प्रकाशित लघुकथा मंजूषा में 110 लघुकथाएं संगृहीत हैं। एक जगह में विभिन्न लघुकथाकारों को पढ़ना सुखद होता है। संपादक मंडल के अलावा डॉ. चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’, नेहा शर्मा, पवन मित्तल, बलवीर सिंह वर्मा, राकेशकुमार जैनबंधु, लज्जाराम राघव ‘तरुण’ व विरेन्दर वीर मेहता की रचनाएं संकलित हैं।
पुस्तक : लघुकथा मंजूषा संपादक : रूप देवगुण, ज्ञानप्रकाश ‘पीयूष’ व लाजपत राय गर्ग प्रकाशक : रवीना प्रकाशन, दिल्ली पृष्ठ : 120 मूल्य : रु. 200.

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