एकदा
प्रमाण से बुद्धिमत्ता
एक बार हबीबुल्ला नामक एक सरदार तुर्की के राजा कादिर हसन के पास अपने घोड़े को बेचने के लिए गया। राजा ने पूछा—इसकी क्या कीमत है? सरदार ने जवाब दिया—सिर्फ पांच हजार रुपये, महाराज। राजा ने कहा—मित्र, इसकी कीमत मात्र पांच सौ रुपये से अधिक नहीं है, परंतु सरदार पांच हजार से कम में बेचने को राजी न था। राजा को घोड़ा पसंद था। इसीलिए उसने पांच हजार देकर भी घोड़ा खरीद लिया और साथ में यह भी कह दिया कि दोस्त तुम मुझे ठग रहे हो। सरदार कुछ नहीं बोला और चुपचाप रुपये अपनी जेब में रख लिए और इसके बाद वह पलटकर गजब की तेजी से उसी घोड़े पर चढ़ा और तीर की गति से राजमहल से बाहर निकल गया। राजा कादिर ने अपने बीस घुड़सवारों को सरदार के पीछे लगा दिया। दिनभर पीछा करने के बाद भी वे सरदार को नहीं पकड़ सके। दूसरे दिन सरदार उसी घोड़े के साथ राजा के दरबार में स्वयं हाजिर हो गया। उसने पांच हजार रुपये राजा के सामने के रखते हुए कहा—महाराज! आपको रुपये रखने हों तो रुपये रख लें, घोड़ा रखना हो तो घोड़ा रख लें। मैंने अपने घोड़े की काबिलियत का सबूत दे दिया है। राजा ने सिर झुका लिया। सरदार को पांच हजार घोड़े की कीमत और पांच हजार रुपये इनाम दिए गए। बुद्धिमान व्यक्ति प्रमाण देते हैं और बुद्धू कुछ नहीं दे सकते।
प्रस्तुति : सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’
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