भारतीय चेतना की ऊर्जा का संवर्धन
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सत्यपाल शर्मा ने अपने बहुकृतिक साहित्य-सृजन से देशव्यापी पहचान बनाई है। विशेष उल्लेखनीय यह है कि महाकाव्य व खंड काव्य तथा ऐतिहासिक ग्रंथों की क्षीण होती परम्परा को अपनी सर्जना से विशेष गुणवत्ता प्रदान की है। उन्हें कवि और कथाकार के रूप में जाना जाता है। इनके अब तक पांच कहानी संग्रह, गुरुबाणी सुधासार, निबंध संग्रह, कालिदास का रचना संसार के साथ-साथ महाभारत युगीन युद्धतंत्र आदि तीन ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं।
सद्यप्रकाशित ‘वाल्मीकि का रचना संसार – वाल्मीकि रामायण का सामाजिक सांस्कृतिक अध्ययन’, एक अनूठा संग्रह है। रचनाकार की जन्मभूमि स्यालकोट और कर्मभूमि हिमाचल प्रदेश रही। ग्रामीण पृष्ठभूमि होने के कारण वहां की संस्कृति उनकी रचनाओं में रची-बसी है।
रामायण ऐसी कालजयी और चिरनूतन रचना है जिसे जितनी बार पढ़ो उतनी बार नया रस और नई दृष्टि प्राप्त होती है। ‘यावत स्थास्यन्ति महीतले।’ रचनाकार ने अपनी पैनी दृष्टि से इसे देखकर, पढ़कर और गुनकर हमारे हाथों में सौंपा। दो खंडों में विभाजित यह रचना संसार 45 शीर्षकों से विभूषित है। जिसमें संपूर्ण रामायण समाहित है। प्रथम खंड में ‘रामकथा के अमर गायक आदि कवि वाल्मीकि शीर्षक से लेकर रामायण की अलंकृत भाषा में शीर्षक तक समेटे हैं। जो रामायण कथा के अलग-अलग पक्षों को विश्लेषित और उद्घाटित करते हैं। विशेष बात तो यह है कि डॉक्टर सत्यपाल शर्मा इन लेखों में पूर्व स्थापित तथ्यों या मान्यताओं का पिष्टपोषण नहीं करते, अपितु नये बिन्दु उद्घाटित कर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
‘रामायण के मानवेतर पात्र’ के शीर्षक के अन्तर्गत उन पात्रों का वर्णन किया है जिन्होंने अपना दायित्व निभाने के लिए अपने प्राणों की भी बाजी लगा दी थी। दैहिक बल और आत्मिक ऊर्जा से संपन्न ये पात्र हर उस नैतिक नियम, सामाजिक मर्यादा और मानवीय भाव बोध का पालन करते हैं, जिनके लिए प्रायः मनुष्य समाज ही नियत माना जाता है।
सम्प्रेषणीयता, शिल्प और भावानुभूति की प्रामाणिकता इस कृति की विशिष्टता है। कलेवर के साथ-साथ मुखपृष्ठ, संयोजन कृति के विषयों की भांति ही उत्कृष्ट है। वर्तमान संक्रांति काल की विभीषिका और विकृतियों को दूर करने में रचनाकार का संदेश नई पीढ़ी को प्रेरणा देने योग्य है। कृति की सरसता, सरलता, सहजता एवं स्वाभाविक प्रवाह पाठक को अपने साथ ले चलने में समर्थ है। आज की युगीन परिस्थितियों में वाल्मीकि के रचना संसार की उपादेयता है।
पुस्तक : वाल्मीकि का रचना संसार भाग-1 व भाग-2 लेखक : डाॅ. सत्यपाल शर्मा प्रकाशक : समाज धर्म, ऊना, हि.प्र. पृष्ठ : क्रमश: 348, 264 मूल्य : क्रमश: रु. 500, 450.
आनंदमय जीवन के गुर
शक्ति वर्मा
पुस्तक ‘आनंदमय सफल जीवन’ के लेखक एसपी गर्ग ने बड़ी खूबसूरती से जीवन की उलझनों को सुलझाने की कोशिश की है। पुस्तक में लेखक ने जिन्दगी की सफलता के कुछ टिप्स बताए हैं, जिनके माध्यम से लोग अपना जीवन आसान और बेहतर बना सकते हैं।
जीवन में श्वास और विश्वास दोनों की जरूरत होती है। श्वास खत्म तो जिंदगी का अंत और विश्वास खत्म तो सम्बन्धों का अंत। इसी तरह वे आगे बताते हैं कि जिसके पास जो होता है, वह वही बांटता है। चाहे वो धन हो, अन्न हो, सम्मान हो, अपमान हो, नफरत हो, प्यार हो। दुख बांटने से घटता है और सुख बांटने से बढ़ता है।
लेखक का कहना है कि शांति पूरी तरह से हमारे अंदर की चीज है। वे मूलमंत्र बताते हैं—जिंदगी तो एक रेडियो है। उसमें जो भी आ रहा है, उसी का आनन्द लें, व्यस्त रहें, मस्त रहें स्वस्थ रहें। जिंदगी जब हंसाये, तो समझ लेना चाहिए कि अच्छे कर्मों का फल मिल रहा है और जब रुलाये तो समझना कि अच्छे कर्म करने का समय आ गया है।
लेकिन सबसे बड़ी बाधा आदमी के अच्छे इनसान बनने की है। वे बताते हैं—थोड़ी नम्रता, लचीलापन, अपनापन, मोहब्बत के साथ आप अच्छा इनसान बन सकते हैं। आपका कार्य रबड़ बाल की तरह है, जो नीचे गिरती है तो वापस ऊपर आती है, लेकिन बाकी चार गेंद परिवार, स्वास्थ्य, मित्र और आपका विश्वास – शीशे की बनी हुई हैं। एक बार नीचे गिर गईं तो टूट जाती हैं, बिखर जाती हैं, अतः आवश्यक है कि जिन्दगी में इनकी हिफाजत करें। इसी तरह लेखक का कहना है कि आनंद के लिए तनाव मुक्त जीवन होना चाहिए। एक तिब्बती कहावत है, अच्छी जिन्दगी जीने एवं लम्बी उम्र के लिए आधा भोजन लें। दोगुना टहलें, तिगुना हंसें एवं समस्त जीवन मात्र को सम्पूर्ण प्यार दें।
सफल और खुशहाल जीवन के लिए सकारात्मक सोचें, नकारात्मक विचारों एवं लोगों से दूर रहें। जिन्दगी में तीन लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए। मुसीबत में साथ देने वालों को, मुसीबत में साथ छोड़ने वालों को और मुसीबत में डालने वालों को। विचारों पर काबू रखना ही अपने जीवन पर काबू करने का रहस्य है। आपके विचारों से ही आपका जीवन स्वर्ग बनता है।
मनुष्य को सफलता आत्मविश्वास से मिलती है। वे कहते हैं कि मार्टिन लूथर किंग ने कहा है कि अगर आप उड़ान नहीं भर सकते तो दौड़ो। अगर दौड़ नहीं सकते तो चलते रहो। चल नहीं सकते तो रेंगो। लेकिन जो भी करो, निरन्तर आगे बढ़ते रहो आत्मविश्वास के साथ। ‘अवसर’ को संजोकर उपयोग करें।
पुस्तक में लेखक अच्छा इनसान बनने की सीख देता है। जब आप अकेले हों तो अपने विचारों पर नियंत्रण रखें। जब आप मित्रों, परिवार में हों तो अपने बोलने पर नियंत्रण रखें। जब आप समाज में हों तो अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखें। जब कोई आपको उद्वेलित कर रहा हो तो अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें। कारपोरेट जगत का रोडमैप देते हुए वे नौकरी में सफलता के संबंध में भी कुछ राय देते हैं जैसे अपने बास से तर्क न करें। अपने विचारों को शालीन बनाकर रखें। कभी भी अपने बास से ज्यादा होशियार बनने की कोशिश न करें। युवा वर्ग के लिए यह पुस्तक भविष्य का रास्ता दिखाने वाली बन सकती है।
पुस्तक : आनंदमय सफल जीवन लेखक : एस.पी. गर्ग प्रकाशन : एम.के. पब्लिकेशंस जयपुर पृष्ठ : 144 मूल्य : रु. 210.
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