ब्लॉग चर्चा

वर्षा सिंह
आर्थिक आत्मनिर्भरता वाकई बहुत मायने रखती है। खासतौर पर महिलाओं की आत्मनिर्भरता। घर को चलाने वाली महिला हो या फिर अकेले ही जीवनयापन करने वाली। अगर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी तो जीवन के कठिन फैसले लेने के अलावा घर-परिवार को सही दिशा भी दे सकेगी। इस संबंध में मैंने एक पत्र लिखा है। जब मेरी बेटी सोलह की हो जाएगी, तो मैं उसे यह पत्र तोहफे के रूप में दूंगी। मैं उसे बताऊंगी कि बेटा जन्म देना तो आसान होता है, लेकिन पालना मुश्किल। यूं तो शादी के बाद ही दफ्तर में महिलाओं के प्रति बाकी लोगों का रवैया बदल जाता है। लेकिन बच्चे के जन्म के बाद वे तरह-तरह के हथकंडे अपना कर ये साबित करने की कोशिश करते हैं कि एक मां बनते ही एक औरत की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं और वे दफ्तर में अपने कार्य में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पातीं। मैंने ऐसे तमाम लोगों की सोच को ख़ारिज किया।
बेटी जब तुम मेरे गर्भ में पांच महीने की थी मैं नाइट शिफ्ट करती रही। लगातार दफ्तर जाती। यह भी खयाल रखती कि कोई असावधानी नहीं हो। यही नहीं, तुम्हारे पैदा होने के पांचवे महीने मैं दफ्तर में थी, सच कहती हूं तुम्हें छोड़ कर आने में कलेजा छलनी होता था, लगता था कि तुम्हारे साथ कितना अन्याय कर रही हूं। छोटी-सी बच्ची को घर पर छोड़कर करीब 8 से 10 घंटों के लिए घर से बाहर जा रही हूं। वाकई एक नन्ही-सी जान के लिए यह अन्याय है। इस सबके बावजूद फिर सोचती थी कि जब तुम बड़ी होगी तो समझोगी कि तुम्हारी मां ने ये सब सिर्फ अपने करिअर के लिए ही नहीं किया, अस्तित्व के लिए किया।
जब तुम पढ़ रही होगी, कई इम्तिहान दे चुकी होगी और कई और इम्तिहान बाकी होंगे, तुम जानोगी की इस समाज में बराबरी का हक़ हासिल करने के लिए आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर होना कितना जरूरी है। जीवन के तमाम इम्तिहानों से गुजरते हुए दुनियादारी की भी समझ तुममें आने लगेगी। इसके साथ ही यह समझ भी कि आत्मनिर्भरता है तो समाज में इज्जत भी है। समाज का समय-समय पर बदलता नजरिया भी धीरे-धीरे समझ में आने लगेगा। मैं चाहूंगी कि तुम आत्मनिर्भर बनो। तुम्हे ढेर सारा प्यार।

साभार : बारीश डॉट ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम

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