आवारा कुत्तों से उपजी महामारी
टोरंटो, 15 अप्रैल (एजेंसी)
कोरोना वायरस के प्रसार में भूमिका को लेकर वैज्ञानिक विभिन्न प्रजातियों का अध्ययन कर रहे हैं। अनुमान है कि आवारा कुत्तों की आंतों से इस वायरस का तेजी से फैलाव हुआ। अध्ययन अनुमान के मुताबिक सीसीओवीएस बेहद संक्रामक आंत की बीमारी है जिसने दुनियाभर के कुत्तों को प्रभावित किया था। बताया गया कि कोरोना सबसे पहले चमगादड़ों से कैनिडाए परिवार में फैला जिन्होंने उनका मांस खाया था। कनाडा में ओटावा यूनिवर्सिटी के शिहुआ शिया के अनुसार, ‘सार्स कोविड 2 के पूर्वज वायरस चमगादड़ों में पाया जाता है। इससे भेड़िए और कुत्तों पर आधारित कैनिडाए परिवार की आंतों में संक्रमण हुआ और संभवत: उनमें तीव्र क्रमिक विकास हुआ और वायरस इंसानों तक पहुंच गया।’ मालिक्यूलर बायोलोजी एंड एवोल्यूशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह बीमारी सांपों से शुरू हो कर कई प्रजातियों में होती हुई हाल ही में पेंगोलिन तक पहुंची है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन के परिणाम इस बात को रेखांकित करते हैं कि कैनिडाए परिवार में कोरोना वायरस जैसे सार्स की निगरानी की जरूरत है। इस शोध में शिया ने सभी 1252 बीटा कोरोनावायरस जीनोम का अध्ययन किया जो जीन बैंक में जमा हैं। जेनेटिक सीक्वेंस वाले इस डाटाबेस तक पहुंच निर्बाधित है। उन्होंने बताया, ‘सबसे पहले वायरस एक ऐसे टिश्यू में पैदा हुआ जिसमें जेडएपी का उच्च स्तर था। यह निम्न सीपीजी वाले वायरल जीनोम के लिए फायदेमंद होता है।’ दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरस का जिंदा रहना इस बात का संकेत है कि यह जेडएपी से बचने में कामयाब रहा। दूसरे शब्दों में कहें तो वायरस इंसानों के लिए बेहद घातक और खतरनाक बन चुका है।’ जब शिया ने कुत्तों में इन आंकड़ों का अध्ययन किया तो पाया कि कैनिडाए परिवार में पाए जाने वाले कोरोना वायरस के केवल एक जीनोम में वही सीपीजी वैल्यू है जो सार्स कोविड 2 और बैटकोविड आरएटीजी 13 में पायी गयी थी।
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