विष्णु गुप्त

मैं एक दूरदराज के गांव में था। जैसे ही रात्रि के नौ बजे वैसे ही पूरे गांव में बिजली की लाइटें बंद हो गयीं, घी-तेल के दीये जलने लगे, सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि शंख, थाली और अन्य बाजे बजने लगे, पर पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का पालन करते हुए देखे गए। हर कोई दीपक भी जला रहा था, शंख भी बजा रहा था पर दूरी भी बनाकर रख रहा था। शहरों और बड़े लोग तो इस तरह के अभियानों और संकल्पों के साथ जरूर खड़े होते हैं पर जब छोटे कस्बे और देश के दूरदराज के गांवों तक इस तरह का अभियान संकल्प में बदल जाता है तो फिर यह अतुलनीय और मिसाल बन जाता है। गांव के किसान, मजदूर से लेकर खुद प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के साथ ही साथ रतन टाटा जैसी औद्योगिक हस्तियां भी इस दीपोत्सव के साक्षी बने, जिससे देश के 130 करोड़ लोगों के बीच विश्वास का संचार हुआ है। कोरोना के संक्रमण से लड़ने के लिए शक्ति मिली है।
यह सही है कि कोरोना का इलाज कठिन है, पर बचाव आसान है। बचाव ही एक मात्र उपाय है, रास्ता है, जिससे हम कोरोना पराजित कर सकते हैं। कोरोना संक्रमण सिर्फ हमारी जिंदगी को ही नहीं लूट रहा है, विध्वंस कर रहा है बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था को भी तहस-नहस कर दिया है, हमारी अर्थव्यवस्था इस महामारी से वर्षों-वर्ष तक कीमत चुकाती रहेगी। दुनिया के सबसे बड़े और अर्थव्यवस्था के तौर पर समृद्ध देेश भी इस बीमारी के सामने त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहे हैं।
कोरोना के खिलाफ दीपोत्सव की उपलब्धि कई संदेश देने वाला है। एक संदेश यह है कि देश की 130 करोड़ जनता को अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पूरा भरोसा है। जनता को महसूस हो रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए ईमानदार हैं, हरसंभव कोशिश कर रहे हैं, कड़े फैसले ले रहे हैं। संकल्प के साथ जागरूक भी कर रहे हैं, संकटकाल के बीच-बीच दीपोत्सव जैसे कार्यक्रम से जनता को इच्छाशक्ति का भी अहसास करा रहे हैं। दूसरा संदेश यह है कि कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ने वाले और अपने जीवन की परवाह नहीं करते हुए पराक्रम दिखाने वाले डॉक्टर, नर्स, पुलिस और सफाई कर्मचारियों सहित संबंधित अन्य लोगों के प्रति सहानुभूति जगाना और उनके प्रति सिर झुकाना है।
कोरोना संक्रमणकाल के दौरान डॉक्टरों और पुलिस ने जिस प्रकार से मानवीय चेहरा दिखाया है, त्याग की कहानियां लिखी हैं उससे डॉक्टरों और पुलिस के प्रति आम जनता में विश्वास बढ़ा है, इनकी छवि एक कर्तव्यपरायण की बनी है। तीसरा संदेश पूरी दुनिया को गया है। दुनिया को यह संदेश गया है कि भारत अपनी पुरातन संस्कृति से संकल्प लेकर, पुरानी संस्कृति के प्रति समर्पित होकर कोरोना संक्रमण जैसी जानलेवा बीमारी से लड़कर बाहर निकल सकता है। शेष दुनिया की संस्कृति जहां भोगवाद पर आधारित है वहीं भारत की संस्कृति त्याग और संयम व कल्याण पर आधारित है। चीन के भोगवाद से ही यह संक्रमण पैदा हुआ और फैला है। दुनिया की भोगवाद की संस्कृति ऐसे जानलेवा बीमारी से लड़ ही नहीं सकती है। सिर्फ त्याग और संयम की शक्ति ही ऐसी बीमारी को परास्त कर सकती है। चौथा ऐसे लोगों को करारा संदेश मिला है जो मोदी के इस दीपोत्सव के अभियान की खिल्ली उड़ा रहे थे और इसे अंधविश्वास करार दे रहे थे।
हमारे देश में कुछ ऐसे लोग हैं, कुछ ऐसी पार्टियां हैं और कुछ ऐसी जमातें हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य हर उस कार्यक्रम, नीति और अभियानों की आलोचना करना, खिल्ली उड़ाना ही नहीं, बल्कि देश की संस्कृति को भी लांक्षित करना है। आपने देखा होगा कि जब पहली बार नरेन्द्र मोदी नेे कोरोना संक्रमण से लड़ने वाले डॉक्टरों, नर्सों और पुलिस के मनोबल बढ़ाने के लिए थाली बजाने या अन्य वाद्ययंत्र बजाने की अपील की थी तब भी विपक्षी पार्टियों ने हंसी उड़ायी थी, तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग ने हंसी उड़ायी थी और अन्य जमातों ने भी हंसी उडाई थी, कहा था कि थाली बजाने से कोरोना नहीं भागेगा। फिर नरेन्द्र मोदी ने नौ मिनट का दीपोत्सव मनाने की पहल की और देशवासियों से सहयोग की अपील की तो फिर विपक्षी पार्टियां, तथाकथित बुद्धिजीवी और जमातों ने हंसी उड़ाने और अंधविश्वासी घोषित करने की कोई कसर नहीं छोड़ी। सिर्फ कोरोना संक्रमण काल के दौरान ही नहीं, बल्कि देश में जब-जब संकट आता है तब-तब ऐसी श्रेणी के लोग देश के खिलाफ ही खड़े हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे तत्व भी सकिय हैं जो तबलीगी जमात के कदम को कितु-परंतु के जरिये सही ठहराने का अपराध कर रहे हैं। अपने आप को उदारवादी और मानववादी घोषित कर रखे हैं। कोरोना संकट काल में ऐसे लोग तो सरकार को ही कठघरे में खड़ा करने का काम कर रहे हैं।
दुनिया अचंभित है। दुनिया के अचंभित होने का कारण भारत की कोरोना से लड़ने की शक्ति है। इटली, जर्मनी, स्पेन जैसे देशों की सरकारों ने जहां अपने हाथ खड़े कर दिये हैं और जनता से कह दिया है कि नियंत्रण उनके हाथ से बाहर है, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भी त्राहिमाम कर रहे हैं। अमेरिका तो अब कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए भारत से सहायता और सम्मिलित प्रयास चाहता है। जब दुनिया के बड़े देशों और साधन की प्रचुरता वाले देशों की स्थिति इतनी नाजुक और गंभीर बनी हुई है तब भारत की स्थिति का संतोषप्रद होना भी एक बड़ी उपलब्धि है। तबलीगी जमात की गलती नहीं होती तो निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि कोरोना संक्रमण देश के दूरदराज क्षेत्रों तक नहीं पहुंचता।

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