तिरछी नज़र

गिरीश पंकज

बाहर कोरोना-दैत्य घूम रहा था, और उससे लड़ने के लिए एक ‘अति उत्साही’ का मन रह-रहकर मचल रहा था। वह युवक सजधज कर बाहर निकलने वाला ही था, तभी मां ने उसे समझाया, ‘नादान, बाहर मत निकलना। कोरोना तुझे अपनी चपेट में ले लेगा या पुलिस का डंडा तुझे सबक सिखा दे।’ लेकिन वह निकल ही गया। फिर वही हुआ, जिसका डर था। पुलिसिया डंडे से उसकी पीठ सूज गई और वह कराहते हुए घर लौटा। मां ने कहा, ‘नादान, क्या तुझे इतना भी नहीं मालूम कि लॉकडाउन के समय बाहर घूमना प्रतिबंधित है? कोरोना से लड़ने का यही एक उपाय है।’
बालक ने कहा, ‘मैं कोरोना फोरोना से नहीं डरता। वह मुझे जहां कहीं मिलेगा उसे पटक दूंगा। मां ने समझाते हुए कहा, ‘बेटा, वह एक ऐसा भयानक शत्रु है, जो सामने नहीं आता। वायरस है पगले। शरीर में घुस जाता है और धीरे-धीरे मनुष्य को निगलने की कोशिश करता है। दुनियाभर में अनेक लोग मर रहे हैं।’
मां की बात सुनकर बेटे ने ठहाका लगाया और बोला, ‘मैं एक बार फिर बाहर निकलूंगा। मैं नहीं डरने वाला। मैंने अनेक फिल्में देखी हैं, जिसमें हीरो दुश्मनों के बीच जाता है और ढिशुम-ढिशुम करके उनको मार कर ही घर लौटता है। मैंने उन हीरो से बड़ी प्रेरणा ली है।’
मां सिर पीटने लगी और बोली, ‘फिल्मी नायकों के कारण न जाने कितने लड़कों की बुद्धि भ्रष्ट हो रही है। हे राम! अब इस नालायक को कैसे समझाऊं।’ मां ने टीवी दिखाया और समझाया, ‘देख दुनियाभर में कितने लोग कोरोना के कारण मर रहे हैं। अपने देश में भी धीरे-धीरे लोग संक्रमित हो रहे हैं और तू कोरोना से लड़ने की बात कर रहा है? इससे लड़ना है तो घर के भीतर रहकर लड़ना है।’
बेटे को मां की बात समझ में नहीं आई। उसने कहा, ‘घर पर रहकर मैं किससे लड़ूं?’
मां ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘तू अपनी अज्ञानता से, अपनी नादानी से लड़। कुछ ढंग की किताबें पढ़। अपना सामान्य ज्ञान बढ़ा। ज्यादा होशियारी करने वाले काल के गाल में समा जाते हैं। चलती ट्रेन के बाहर खड़े होकर सेल्फी लेने वाले मौत के मुंह में चले गए। चट्टान के किनारे खड़े होकर सेल्फी लेने वाले कब नीचे लुढ़क जाते हैं, उन्हें पता नहीं चलता। कोरोना से पंगा न ले, वरना अंततः मुझे रोना पड़ेगा।’
मां की बात सुनकर बालक के ज्ञान के कपाट धीरे-धीरे खुलने लगे। फिर उसने मां से कहा, ‘शायद तू ठीक कहती है मां। अभी-अभी व्हाट्सएप में मेरे मित्र के बारे में संदेश मिला है कि उसे कोरोना ने पकड़ लिया है।’ मां मुस्कुराई और बोली, ‘देर आयद, दुरुस्त आयद। जैसी बुद्धि तुझे मिली, वैसी ही बुद्धि दूसरों को भी मिले।’

The post कोरोना, डंडा और अक्ल appeared first on दैनिक ट्रिब्यून.



from दैनिक ट्रिब्यून https://ift.tt/3cgEBMz
via Latest News in Hindi

0 Comments