छोटी-छोटी झोंपड़ियों में रहते हैं 10-10 लोग
रंजू ऐरी डडवाल/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 19 अप्रैल ।
चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा धनास की कच्ची कालोनी को सील तो कर दिया है पर यहां घर-घर जाकर लोगों की जांच कर पाना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए काफी मुश्किल हो रहा है। कालोनी में गत् एक दशक से समाज सेवा कर रही नजमा खान ने कहा कि इलाके में लोग घबरा रहे हैं।
ज्ञात रहे कि गत शुक्रवार को यहां के एक व्यक्ति को कोरोना पाज़िटिव पाया गया था और वह पीजीआई में कार्यरत था। कच्ची कालोनी में करीब 1,600 झोपड़ियों में 8,000 से अधिक लोग रहते हैं जिन्हें पूरी तरह से घरों में बंद कर दिया गया है। यहां 6-10 सदस्यों वाले परिवार 10 वर्ग फुट की झोंपड़ी में रहते हैं। यहां सामाजिक दूरी बनाये रखने का तो सवाल ही नहीं। यहां आज लोगों ने बताया कि वह घरों में कैसे रह सकते हैं जबकि पानी तक के लिए उन्हें घर से बाहर निकालना पड़ता है। शौचालय न होने से इन्हें सार्वजनिक शौचालयों में जाना पड़ता है। यहां अधिकतर दिहाड़ीदार मजदूर रहते हैं। कॉलोनी में पीजीआई , जीएमसीएच 32 में कार्यरत कई सफाई कर्मचारी रहते हैं। ये स्टाफ सदस्य अस्पतालों में कोरोना मामलों से निपटते हैं। एरिया में तैनात एक सिपाही ने कहा कि लाॅकडाउन के बाद से ही इन लोगों को घरों में रखना सबसे मुश्किल काम है। हैं। जिस व्यक्ति में कोरोना संक्रमण मिला, वह अपने पड़ोसियों के संपर्क में था। कॉलोनी में कम से कम 10 घर और धनास के अन्य इलाकों में कुछ और घरों को अब तक सील कर दिया गया है। 15 सामुदायिक संपर्क और 11 कार्यस्थल संपर्क भी क्वारंटाइन किया गया है।
घरों की सही तरीके से मैपिंग नहीं : निगम अधिकारी
नगर निगम के अधिकारी ने कहा कि यहां स्क्रीनिंग मुश्किल साबित हो रही है क्योंकि यह देखना मुश्किल है कि कितने उसके संपर्क में थे । हर मिनट हमें एक नई लीड मिलती है और ट्रैकिंग बंद कर देते हैं। इसके अलावा, इन घरों की सही तरीके से मैपिंग नहीं की गई है, इसलिए निवासियों को अपने स्वयं के घर के नंबर भी पता नहीं हैं। डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग का संचालन करने वाली स्थानीय सहायक नर्स मिडवाइव्स ने दावा किया कि यहां लोग अपने लक्षणों को छिपाते हैं। कार्यकर्ता भी डरते हैं क्योंकि उन्हें उचित पीपीई किट नहीं दी जाती है।
फ्लू लक्षणों वाले करीब 30 लोग रोज आते हैं हेल्थ सेंटर
प्रतिदिन फ्लू लक्षणों वाले करीब 30 निवासी धनास गांव के स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र, जो कि कॉलोनी के ठीक बगल में है, में आते हैं। अगर इनमें से किसी में गंभीर लक्षण पाये जाते हैं तो उन्हें जीएमएसएच 16 में रेफर करते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर को समझाना मुश्किल है।
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