दुनिया को समझने की दृष्टि देती कहानियां
पुस्तक समीक्षा
शक्ति वर्मा
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने लिखा है— ‘रचना के सन्दर्भ में साहित्य का यथार्थ आनुभविक यथार्थ ही है। अनुभव से परे जो यथार्थ है, या हो सकता है, उसको साहित्य नकारता नहीं। अज्ञेय का यह कथन नीलम सपना शर्मा के कहानी संग्रह ‘अहसास आस-पास’ को पढ़ते समय साफ-साफ परिलक्षित होता है।
नीलम सपना शर्मा की कहानियां छोटी छोटी हैं। जिन्हें लघु कहानी के फार्मेट में रखा जा सकता है। लेकिन छोटी होने के बावजूद ये कहानियां अपनी मन्तव्य पाठक तक पहुंचा देती हैं। संग्रह की पहली कहानी गिरगिट है। गिरगिट का नाम लेते ही हमारे जेहन में उसके क्षण भर में रंग बदल लेने का भाव आ जाता है। यही उसकी पहचान है।
अब इस कहानी को देखिये। इसमें एक डॉक्टर का वर्णन है। वह अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहा है। इसी दौरान एक व्यक्ति आता है और डाक्टर से बार-बार निवेदन करता है कि वह एक्सीडेंट में घायल बच्चे का इलाज पहले कर दे। लेकिन डॉक्टर बड़ी हिकारत से उसकी तरफ देखते हुए इग्नोर कर देता है।
कहानी में टर्न तब आता है जब डॉक्टर की बीवी बदहवास हालत में अस्पताल पहुंचती है और बताती है कि उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है और कोई अपरिचित व्यक्ति उसे अस्पताल लेकर आया है। डॉक्टर उस व्यक्ति की तरफ ध्यान से देखता है कि यह तो वही व्यक्ति है, जिसे उसने मरीज को पहले देखने की गुहार लगाने पर दुत्कार दिया था।
नीलम की कहानियां आसपास के परिवेश से ली गई हैं। हम दैनंदिन जीवन में जो न्याय-अन्याय, अच्छाई-बुराई देखते हैं, नीलम ने उन्हीं को अपनी कहानियों का विषय बनाया है और उन्हें शब्दों में पिरो दिया है। ममता की पराकाष्ठा उस नन्ही-सी चिड़िया की कहानी है जो अपने अंडों की रक्षा करती हुई भस्म हो जाती है। कन्या पूजा में समाज के दोहरे चरित्र को उद्घाटित किया गया है।
कहानीकार समाज के दोगले चरित्र पर गहरा कटाक्ष करती है और वह कहानी के माध्यम से यह बताती है कि समाज में अभी भी लड़के और लड़कियों में भेद बरकरार है।
एक कहानी है ‘फर्ज’। इस कहानी में एक संतानहीन दंपति एक अनाथ बच्चे को गोद लेते हैं। इसके लिए उन्हें अपने परिवार के भारी विरोध का सामना करना पड़ता है। कुछ दिनों बाद ही पति की मौत हो जाती है। इसके बाद सास-ससुर विधवा बहू को आश्रय देने से इनकार कर देते हैं। लेकिन मां अपने बच्चे के पालन पोषण में कोई कसर नहीं छोड़ती। लेकिन बाद में बेटे और बहू उसे परेशान करते हैं।
अंर्स्ट फिशर ने लिखा है कि ‘कला इसलिए जरूरी है कि आदमी दुनिया को समझ सके और बदल सके। लेकिन कला इसलिए भी जरूरी है कि उसमें आकर्षण अंतर्निहित होता है।’ इन दोनों कसौटियों पर नीलम सपना शर्मा की कहानियां खरी उतरती हैं।
पुस्तक : अहसास आस-पास लेखिका : नीलम ‘सपना’ शर्मा प्रकाशक : साहित्यागार, धामाणी मार्केट की गली, जयपुर पृष्ठ : 102 मूल्य : रु. 200.
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