आपकी राय
साझे प्रयास जरूरी
16 मार्च के संपादकीय, ‘मुसीबत से मुनाफा’ में दैनिक ट्रिब्यून ने उचित आकलन किया है कि समाज व सरकार के तमाम विभाग मिलकर ही इस वायरस को महामारी बनने से रोक सकते हैं। राज्यों में कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करना संवेदनशीलता को सराहनीय तौर पर दर्शाता है। कोरोना से पीड़ितों की आर्थिक स्थिति के मद्देनज़र उनका सारा खर्च सरकार अवश्य वहन करें।
युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद
मार्गदर्शक सृजन
8 मार्च के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन स्तंभ में रूप सिंह चंदेल की कहानी ‘कुट्टी’ जिंदगी की व्यथा बयां करने वाली रही। इंसान जो सोचता है वह नहीं होता। जिंदगी के सफर में कौन, कहां, कब और किससे मुलाकात होगी, परम सत्ता को ज्ञात है। कथा नायक सुधींद्र बाबू के साथ हुए वाकया खून के घूंट पीकर ही जीने की प्रेरणा देते हैं।
अनिल कौशिक, क्योड़क
विश्वसनीयता का संकट
कभी लोगों के बीच विश्वास का आधार बना सोशल मीडिया शनै: शनै: अपनी अस्मिता खोता जा रहा है। अविश्वसनीय और फर्जी खबरों के साथ ही बिन जरूरी जानकारियां इसके औचित्य पर प्रश्नचिन्ह उठाती लग रही हैं। अगर ऐसे ही फर्जीवाड़ा जारी रहा तो इसकी गत पोस्ट कार्ड से भी गई बीती हो जाएगी।
अमृतलाल मारू, दसई, धार
अच्छा नहीं
17 मार्च के दैनिक ट्रिब्यून में छपी एक खबर ‘पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई राज्यसभा में मनोनीत’ पढ़कर अच्छा नहीं लगा। सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, हाई कमिश्नर या एंबेसडर, वायुसेना, जलसेना तथा थलसेना अध्यक्ष को न तो किसी पद पर नियुक्त करना चाहिए, न ही राजनीति में भाग लेना चाहिए।
शामलाल कौशल, रोहतक
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