आपकी राय
भ्रम दूर करें
प्रधानमंत्री ने देश की जनता से कोरोना वायरस से निपटने के लिए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है। केंद्र और राज्य सरकारों ने भी लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछेक व्यापारिक संस्थान भी बंद करने के आदेश दिए हैं। लेकिन सरकारों के ऐसे फरमानों से लोगों में घबराहट पैदा हो गयी है। वे खाद्य पदार्थों की जमाखोरी करने लगे हैं। सरकार को चाहिए कि वह भ्रांतियां दूर करे।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर
सूना है आंगन
18 मार्च के दैनिक ट्रिब्यून में संपादकीय पृष्ठ पर ‘घर का आंगन सूना है उसके बिना’ लेख पढ़ा। एक समय था जब आंख खुलते ही कानों में पक्षियों की मधुर ध्वनि सुनाई पड़ती थी। वह मनमोहक सुबह पूरे दिन हमें तरोताजा कर दिया करती थी, मगर समय ने आज उन छोटे-छोटे पक्षियों को हमसे दूर कर दिया है। गांवों में तो फिर भी पक्षी देखने को मिल जाएंगे। इनके संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर भी समाज को आगे आना पड़ेगा।
साजिद अली, चंदन नगर, इंदौर
असंगत वृद्धि
केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 3 रुपये की एक्साइज ड्यूटी लगाकर महंगाई का बोझ डालना अनुचित है। एक तरफ सरकार चिंता करती है कि हम महंगाई को कम करने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पेट्रोलियम पदार्थों की गिरती कीमत पर एक्साइज ड्यूटी लगा कर भार बढ़ाना कहां का न्याय है? एक्साइज ड्यूटी को तत्काल हटाया जाना ही ठीक होगा।
हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, म.प्र.
जागरूक करें
पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संकट दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि लोगों को सही जानकारी देना ही बुद्धिमत्ता होगी। सीधे-सीधे इस बीमारी का उद्गम विदेशी पर्यावरण को जाता हैै। ऐसे में हम थोड़ी-सी सतर्कता का परिचय दें तो इस बीमारी के तीसरे-चौथे चरणों को आने से रोका जा सकता है। समाज को जागरूक करें व स्वयं भी सुरक्षित रहें।
अभिनन्दन भाई पटेल, लखनऊ
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