बाल कविता
मिट्टी कूल फ्रिज
मनसुख भाई ने कर डाला,
अजब अनूठा काम।
मिट्टी कूल फ्रिज बनाया,
सस्ते उसके दाम।
पानी के संग ताज़े रखता,
फल मिट्टी के अंदर।
सब्जी दूध दही मलाई,
खीरे और चुकन्दर।
पर्यावरण रहे सुरक्षित,
ठंडा घर का कोना।
पीछे छूटे पांच सितारे,
ना बिजली का रोना।
नई कहानी शीतल पानी,
रखिए साफ सफाई।
चाक चलाने वालों के,
रहबर मनसुख भाई।।
नरेन्द्र सिंह नीहार
ऋतु चक्र
सुनकर गर्मी की आहट,
सर्दी ने दौड़ लगाई।
सूरज ने तेवर बदले,
धूप ने ली अंगड़ाई।
पकी फसल है खेतों में,
सरसों की हुई कटाई।
चुपचाप परीक्षा ने भी,
कर दी है शुरू चढ़ाई।
वसंत जाते ही आया,
फिर फागुन का हुड़दंग ।
लाल- गुलाबी सभी हुए,
बजे खूब ढोल-मृदंग।
कूलर- पंखे बैठे हैं,
अभी चलने को तैयार।
शीतलहर ने छोड़ दिए,
अब करने तेज प्रहार।
ऋतु चक्र लगता अनोखा,
झड़ते हैं पुराने पात।
मौसम के अनुकूल पेड़
बदलते हैं अपने गात।
धरती घूमे धुरी पर ,
बात सभी को बतलानी।
सारे मौसम अलबेले,
सबकी करनी अगवानी।
गोविंद भारद्वाज
The post बाल कविता appeared first on दैनिक ट्रिब्यून.
from दैनिक ट्रिब्यून https://ift.tt/2xhW8Vi
via Latest News in Hindi
0 Comments