अनुभूति की गहन अभिव्यक्ति
बहुत टूटा हुआ मन जब कलम थामकर सृजन पथ पर निकलता है, तब भावों की नदियां पन्नों पर उतरती हैं। हालांकि, एक ओर अकेलापन तोड़ता है, पर कलम थामकर लिखने-पढ़ने वाला व्यक्ति, स्वयं को संभाल लेता है। ऐसे में अनुभूतियों का अभिव्यक्तियां बन पन्नों पर उतर जाना अदृश्य प्रार्थनाओं के जैसे होता है, जिनको ईश्वर ने हमारे निमित्त किया होता है। मधु गोयल का काव्य संग्रह ‘घायल पंछी’ विभिन्न भावों का 106 कविताओं के रूप में संग्रहण है। उनकी कुछ कविताओं की पंक्तियों को बताना चाहूंगी :-‘कंधा तो सभी देते हैं मौत पर अर्थी को/ चाहिए कोई जीवन की राह दिखाने वाला…’
अनंत पीड़ाओं के बीच दृढ़ इच्छाशक्ति वाला व्यक्ति कठिन समय भी कमजोर नहीं पड़ता। उनकी कविता की पंक्ति है :-‘पंख भले ही कट जाए, पर उड़ूगी जरूर/ बुझने से पहले/लौ बनकर जलूंगी जरूर…’
एकाकी जीवन में प्रेम की महत्ता व्यक्ति को मरुस्थल में पानी के जैसे महसूस होती है :-‘कोई ऐसा होता/ जो जिस्म की अपेक्षा/ रूह से प्यार करता… चाहिए था केवल वही शख्स/ जो सिर्फ और सिर्फ मोहब्बत की बात करता…’
कुछ बाल कविताएं भी मधु के संग्रह में पढ़ने को मिली :-‘देखो कुल्फी वाला आया/ रंग-बिरंगी कुर्सी लाया…’
लेखिका स्वयं कहती है कि रचनात्मक अभिव्यक्तियों के प्रकाशन से जीवन में स्फूर्ति का संचार होता है।
पुस्तक : घायल पंछी लेखिका : मधु गोयल प्रकाशक : क्रेजी ऑफसेट, कुरुक्षेत्र पृष्ठ : 108 मूल्य : रु. 250.
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