खेतों और कारखानों में होगा ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल
ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
चंडीगढ़, 28 फरवरी
हरियाणा के खेतों और कारखानों में अब सीवरेज के ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल होगा। थर्मल प्लांट और बड़े कारखानों में इसका इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। सरकार इसके लिए 1098 करोड़ 25 लाख रुपये की परियोजना को पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे चुकी है। बजट में पहले चरण के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रबंध किया गया है।
प्रदेशभर में कुल 207 एसटीपी हैं, जहां से उपचारित जल आ रहा है। इसे सूक्ष्म सिंचाई के साथ-साथ सौर व ग्रिड संचालिक एकीकृत सूक्ष्म सिंचाई के प्रयोग में लाया जाएगा। इतना ही नहीं, सरकार ने 13 जिलों की 22 हजार 555 एकड़ भूमि की सिंचाई ट्रीटेड वाटर से करने के लिए 189 करोड़ 46 लाख रुपये की परियोजना नाबार्ड को भेजी है।
वहीं पीपीपी मोड से हिसार, फतेहाबाद और सिरसा में 57 हजार 352 एकड़ भूमि में सूक्ष्म सिंचाई के लिए परियोजना बनी है। 399 करोड़ 97 लाख रुपये की यह परियोजना भी सूक्ष्म सिंचाई कोष के तहत नाबार्ड से मंजूर होगी। इन दोनों नहरी परियोजनाओं के अंतर्गत नहरी पानी के भंडारण के लिए औसतन 10 फीट की गराई के लगभग 160 टैंकों का निर्माण होगा। इनकी भंडारण क्षमता 16 मिलियन घन फुट होगी। सरकार ने राज्य की लगभग 80 हजार एकड़ भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया है। सूक्ष्म सिंचाई योजना को बढ़ावा देने के लिए ‘ड्रॉप मोर क्रॉप’ नामक नई योजना शुरू की है। 1200 करोड़ रुपये की इस योजना के अंतर्गत चार प्रोजेक्ट पर काम होगा। नाबार्ड द्वारा पैसों का प्रबंध किया गया है। सूक्ष्म सिंचाई के तहत सरकार ने 36 खंड भी चिह्नित किए हैं।
केएमपी के साथ नहर, मेवात पहुंचेगा पानी
मेवात में पेयजल पहुंचाने के लिए सरकार ने कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे के समानांतर पाइप लाइन लगाने का निर्णय लिया है। बादली के पास गुरुग्राम वाटर सप्लाई चैनल से पाइप लाइन के जरिये गुरुग्राम नहर तक पानी पहुंचाया जाएगा। फिर यह पानी नए मेवात फीडर नहर के जरिये मेवात के लोगों तक पहुंचेगा। साथ ही, 450 क्यूसिक क्षमता वाली जीडब्ल्यू एस चैनल का पुनर्निमाण काकरोई हैड से बादली तक होगा। उमरा माइनर तथा शादीपुरा माइनर के पुनर्वास के लिए 5 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
घग्गर का होगा शुद्धीकरण, एसवाईएल के लिए 100 करोड़
घग्गर सहित प्रदेश की सभी नदियों व नालों का शुद्धीकरण होगा। दूषित रसायनों, शहरी व ग्रामीण मल-जल की वजह से इन नदियों में प्रदूषण बढ़ा है। इससे हेपेटाइटस व कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ा है। इसके लिए सरकार नदियों व नालों के शुद्धिकरण के लिए नई योजना बनाएगी। वहीं दूसरी ओर एसवाईएल नहर के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये रखे गए हैं। हालांकि यह पैसा पिछले कई वर्षों से लगातार बजट में रखा जा रहा है। सीएम ने कहा कि एसवाईएल निर्माण के लिए जितना भी पैसा चाहेगी, सरकार उसका प्रबंध करेगी।
नये डैमों के लिए 100 करोड़
रेणुका, किशाऊ और लखवार व्यासी डैम के लिए भी सीएम ने बजट में 100 करोड़ रुपये रखे हैं। सीएम ने कहा कि यमुना नदी पर जल भंडारण के लिए ये डैम बनेंगे। इससे यमुना और उसकी सहायक नदियों –गिरी व टॉन्स से लगातार पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। उत्तरी यमुना नदी बोर्ड को 4158 करोड़ 42 लाख रुपये की प्रारंभिक राशि 5 वर्षों में चरणबद्ध रूप से देनी है। इसी के चलते 2020-21 के लिए 100 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं। प्रदेश में जर्जर व पुरानी नहरों व नालों के पुनर्वास व पुनर्निमाण के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट सीएम ने रखा है।
तालाब अथॉरिटी को 1000 करोड़
प्रदेश के तालाबों व जोहड़ों के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा पहले कार्यकाल में ही तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण (अथॉरिटी) का गठन किया गया था। नहरों से जुड़े गांवों के 4000 तालाबों की खुदाई व गाद निकालने का काम होगा ताकि इनमें जल संरक्षण की क्षमता बढ़ सके। ये काम सिंचाई व जल संसाधन तथा विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किए जाने थे। अब सरकार ने तय किया है कि ये सभी कार्य अथॉरिटी के माध्यम से होंगे। सीएम ने अथॉरिटी को इन कार्यों के लिए 1000 करोड़ रुपये का मोटा पैकेज दिया है।
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