जस्टिस मुरलीधर का तबादला करते सावधानी बरतती सरकार
नयी दिल्ली, 29 फरवरी (एजेंसी)
पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन ने कहा है कि सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश एस मुरलीधर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में तबादला करने का ‘आधी रात’ को आदेश जारी करते हुए ‘थोड़ी सावधानी’ बरतनी चाहिए थी। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 26 फरवरी को तबादले का आदेश जारी किया। उसी दिन न्यायमूर्ति मुरलीधर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कथित घृणा भाषण देने के लिए तीन भाजपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने में दिल्ली पुलिस की नाकामी को लेकर ‘नाराजगी’ जाहिर की थी।
उधर, सरकार ने कहा कि तबादले का किसी मामले से कुछ लेना-देना नहीं है क्योंकि इस संबंध में सुप्रीमकोर्ट कॉलेजियम ने पहले ही सिफारिश कर दी थी और न्यायाधीश ने भी अपनी सहमति दी थी।
‘आधी रात को तबादला आदेश, गलत अर्थ की संभावना’
जस्टिस बालकृष्णन ने कहा कि जब देश में हालात इतने खराब और मीडिया तथा अन्य लोग सक्रिय हैं तो सरकार को आधी रात को ऐसे तबादले के आदेश जारी करते हुए थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए थी क्योंकि इसका लोगों द्वारा कुछ और मतलब निकाले जाने की संभावना है। लोग इसे अलग तरीके से समझ सकते हैं। एनजीओ ‘द कैम्पेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटैबिलिटी एंड रिफॉर्म्स’ ने बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति मुरलीधर के तबादले की निंदा करते हुए दावा किया कि एक ‘ईमानदार और साहसी’ न्यायिक अधिकारी को सजा देने के लिए यह कदम उठाया गया।
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