चंडीगढ़, 4 फरवरी (ट्रिन्यू)
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा ने मंगलवार को राज्यसभा के शून्यकाल में हरियाणा सरकार को घेरते हुए यमुना नदी के प्रदूषित पानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यमुना नदी गंदे नाले के रूप में तबदील हो चुकी है, इससे कई बीमारियां फैल रही हैं। इसके बावजूद हरियाणा सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है।
सैलजा ने कहा कि यमुना नदी का पानी पीने के लिए और कृषि के लिए उपयोग होता है, लेकिन आज यमुना नदी प्रदूषित हो चुकी है। हरियाणा सरकार को यमुना नदी के दूषित पानी को रोकने के लिए 31 दिसंबर, 2020 तक का समय दिया गया है, लेकिन हरियाणा में इसकी रोकथाम के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि नदी का पानी प्रदूषित होने से कृषि और सिंचाई के माध्यम से हमारा फूड चेन भी प्रदूषित हो रहा है। इन सबके बावजूद हरियाणा सरकार सुधार करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। सैलजा ने कहा कि भारत में वर्ष 2030 तक स्वच्छ पानी के एजेंडे को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जो मौजूदा हालत में प्रदूषित नदियों की स्थिति को देखकर बिल्कुल भी संभव नहीं लगता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी वर्ष 2018 की रिपोर्ट में 351 प्रदूषित नदियां चिह्नित की थी।
जारी नहीं हुआ फंड
बकौल कुमारी सैलजा, जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार नमामि गंगे के तहत यमुना नदी को साफ करने के लिए वर्ष 2011 से लेकर अभी तक दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के लिए स्वीकृत राशि 2590.52 करोड़ थी। अभी तक केवल 649 करोड़ रुपये की राशि ही जारी की गई है। इसका मतलब है कि स्वीकृत की गई राशि और जारी की गई राशि में 75 प्रतिशत का बड़ा अंतर है,जो कि पैसा अभी दिया ही नहीं गया है।

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