अब मिल मालिकों के गारंटरों से होगी रिकवरी
चंडीगढ़, 5 फरवरी (ट्रिन्यू)
हरियाणा के जिन चावल मिल मालिकों से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को रिकवरी करनी है, उन्होंने विभाग के कारण बताओ नोटिस का जवाब तक नहीं दिया है। साथ ही उनसे रिकवरी की तारीख भी निकल चुकी है। बुधवार रिकवरी की आखिरी तारीख थी। सभी जिलों से रिकवरी का स्टेट्स तलब किया गया है। जिन मिल मालिकों ने अब भी पैसा जमा नहीं करवाया है, अब उनके बकाया की रिकवरी उनके गारंटरों से होगी।
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने इस संदर्भ में अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। 1300 से अधिक चावल मिलों में धान का फिजिकल वेरिफिकेशन करवाया गया था। इसमें से 1207 मिलों में लगभग 90 करोड़ रुपये कीमत का धान कम मिला था। इन मिल मालिकों को नोटिस जारी करके कारण पूछा गया गया था। 757 मिल मालिकों के जवाब आ गए, जबकि 450 ने कोई जवाब नहीं दिया है। ऐसे में 450 मिल मालिकों से रिकवरी करने के आदेश दिए गए। इन मिलों से बुधवार तक रिकवरी होनी थी। अब दास ने संबंधित जिलों के अधिकारियों से रिकवरी का ब्योरा मांगा है। दूसरी ओर, विभाग 757 मिल मालिकों के जवाब का भी अध्ययन कर रहा है, जिससे उस पर अगली कार्रवाई की जा सके। 450 मिल मालिकों ने धान की मूल कीमत के अलावा ब्याज, जुर्माना और एक फीसदी अतिरिक्त राशि वसूलने को कहा गया था। दास का कहना है कि जिन मिल मालिकों से रिकवरी नहीं हुई है, अब यह पैसा उनके गारंटरों से वसूला जाएगा।
कैथल के एक मिल मालिक के दस्तावेज गायब हो गए हैं। इस मिल को सरकार की ओर से 7 हजार मीट्रिक टन धान दिया गया था और 4000 मीट्रिक टन कम स्टॉक मिला था। लगभग 7 करोड़ रुपये राशि का यह धान बनता है। अब दस्तावेज गायब होने के बाद विभाग ने पुलिस में केस दर्ज करवाया है। इस सदंर्भ में पूछे जाने पर पीके दास ने कहा कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ न हो, इसके लिए तय किया गया है कि आगे से सभी गारंटरों और मिल मालिकों के दस्तावेज स्कैन करके उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
विपक्ष कर रहा सीबीआई जांच की मांग
सरकार भले ही इस पूरे मामले में करीब 90 करोड़ रुपये के घोटाले की बात कह रही है लेकिन विपक्षी दलों ने सरकार को इस मुद्दे पर घेरा हुआ है। विपक्ष के नेता व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि यह सैकड़ों करोड़ का घोटाला है और इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। इनेलो नेता व ऐलनाबाद विधायक अभय सिंह चौटाला इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठा चुके हैं। बजट सत्र में भी वे सरकार को घेरेंगे। उनका कहना है कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश हो रही है। किसानों के साथ ठगी हुई है। साथ ही, सरकारी पैसे का भी दुरुपयोग हुआ है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज या फिर सीबीआई से इसकी जांच करवानी चाहिए।
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