यश गोयल

राजस्थानी भाषा की साहित्यकार सावित्री चौधरी की अब तक 12 पुस्तकें आ चुकी हैं। उनके नये संग्रह : रुपाली (राजस्थानी भाषा) में स्त्री की वेदना और स्वाभिमान की प्रेरक और जीवंत छवि उतारती 15 कहानियां हैं।
शीर्षक प्रधान कहानी में युवती के कॉलेज के बिगड़े और एय्याश किस्म के लड़के के साथ अफेयर और प्रेम-विवाह के प्रसंग हैं जो उसके माता-पिता और बचपन के दोस्त को पसंद नहीं है। प्रेम में धोखा खाकर युवती का पलायन कर घर लौट आना, उसके सुधरने और अपनी इच्छाशक्ति का प्रबल होने का परिचायक है। कहानी ये सोचने को मजबूर करती है कि नायिका ने बोल्ड स्टेप उठाया या वह विवश्ाता की मारी है? ग्रामीण और शहरी परिवेश का टकराहट है।
अन्य कहानियां जैसे भभकती वाणी, बस एक ही बेटी, पछतावे के आंसू, घृणा के बीज, अब भी टाइम है, अधूरी तृष्णा और धुआं-सा में महिला और परिवार के बीच का चित्रण है, जिसमें नारी को सबल दिखाने की पूरी कोशिश की है।
जाने-माने लेखक पूरन सरमा ने इस किताब के फ्लैप पर टिप्पणी में लिखा है कि सावित्री की कहानियां मनुष्य जाति की पूरी पड़ताल करके आज के समाज, परिवार और चारों ओर के परिवेश को कई दृष्टिकोण से चीर-फाड़ कर पाठक को बेहतर कथानक और राजस्थानी भाषा के शिल्प में पिरो कर प्रस्तुत करती हैं। सभी कहानियों में जीवंतता है।
पुस्तक : रुपाली रचनाकार : सावित्री चौधरी प्रकाशक : एमके पब्लिकेशन्स, चौड़ा रास्ता जयपुर पृष्ठ : 114 मूल्य : रु. 275.

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