एकदा
विज्ञान और अंधविश्वास
एक युवक ने धर्माचार्य से पूछा, ‘इतनी उच्च वैज्ञानिक शिक्षा के बावजूद हमारे हिंदुस्तान में धार्मिक अंधविश्वास इतना ज्यादा क्यों है?’ धर्माचार्य ने गंभीर होकर कहा, ‘हमें जन्म-जन्मों से धर्म के नाम पर जो सिखाया गया है, उसका अभ्यास बहुत प्रबल हो गया है और वह हमारे अन्तस में बहुत गहरे में बैठ गया है। विज्ञान की पढ़ाई बहुत ऊपर रह जाती है, वह गहरे में नहीं जाती। विज्ञान मात्र स्कूली शिक्षा तक ही सीमित होकर रह जाता है, वह सोच नहीं बन पाता, दृष्टिकोण नहीं बन पाता। चूंकि विज्ञान से कोई भय नहीं सिखाया गया है और धर्म के नाम पर बहुत भयभीत किया गया है। इसलिए विज्ञान गहरे में नहीं जाता है और वह दृष्टिकोण नहीं बन पाता है। बिना वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सत्य की ओर कदम नहीं बढ़ाया जा सकता। धार्मिक अंधविश्वास सत्य की राह में सबसे बड़ा अवरोध है, यहां धर्म की बातें तो बहुत होती हंै लेकिन धार्मिक कोई दिखाई नहीं पड़ता।’
प्रस्तुति : सुभाष बुड़ावन वाला
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