उ.प्र. सरकार की अनुकरणीय पहल
योगी सरकार ने विभिन्न तकनीकी संस्थानों और उद्योगों में इंटर्नशिप योजना शुरू करके दसवीं-बारहवीं व स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण युवाओं को प्रशिक्षित करने की सार्थक पहल की है। छह माह व साल भर इंटर्नशिप करने वाले युवाओं को ढाई हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जायेगा। मानदेय में केंद्र सरकार का पंद्रह सौ तथा राज्य सरकार का योगदान एक हजार रुपये होगा। सरकार का वादा है कि वह इंटर्नशिप करने वाले युवाओं को एच.आर. सेल के जरिये रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी। नि:संदेह जिस राज्य के पास अपार युवा श्रम शक्ति हो और प्रदेश की जवानी विदेशों व दूसरे राज्यों में सड़कें नापती रही, तो इसे विडंबना ही कहा जायेगा। फैसला इस नजरिये से भी महत्वपूर्ण है कि हमारे अधिकांश शिक्षण संस्थान मैकाले की शिक्षा पद्धति के ढांचे से मुक्त नहीं हो पाये हैं, तभी स्कूल-कॉलेज बाबू बनाने की फैक्टरियां बने हुए हैं। तभी चपरासी से लेकर सफाईकर्मियों की नौकरी निकलने पर पीएचडी और अन्य उच्च शिक्षा हासिल युवा आवेदन करते नजर आते हैं। यह इन डिग्रियों का भी अपमान है और प्रतिभाओं की बेकद्री भी है। देश की प्रलोभनकारी राजनीति ने युवाओं को काहिल बनाया है जो बेरोजगारी भत्ता, लैपटॉप, मोबाइल व अन्य सुविधाएं वोट के एवज में देने की बात करते हैं। जरूरत इस बात की है कि युवाओं को काम का हुनर दिया जाये। जरूरी नहीं है कि सरकारी नौकरी ही मिले। उन्हें उनकी रुचि के अनुरूप प्रशिक्षत करके अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया जाये। यह जानते हुए कि सरकारी नौकरियों का संकुचन लगातार जारी है। समय के साथ चलते हुए अपने हुनर को बाजार की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिये युवाओं को प्रेरित करने की जरूरत है, जिसके लिये राज्य सरकारें रचनात्मक पहल कर सकती हैं, राष्ट्रीय  अर्थव्यवस्था के हित में दूरगामी परिणामों को दृष्टिगत रखते हुए।
उत्तर प्रदेश को डिफेंस कॉरिडोर के रूप में जोड़ने की जिस तरह से कोशिशें हो रही हैं, उससे जुड़ी परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार दिये जाने के लिये प्रशिक्षण की अावश्यकता है। पिछले दिनों लखनऊ में संपन्न डिफेंस एक्सपो में सत्तर देशों के रक्षामंत्रियों, डिफेंस चीफ व राजदूतों की भागीदारी बता रही है कि राज्य में रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे। डिफेंस कॉरिडोर में निवेश के लिये कई देशी-विदेशी कंपनियों ने एमओयू साइन किये हैं। सरकार का दावा है कि इसके जरिये पचास हजार करोड़ का निवेश आयेगा और पांच लाख युवाओं को नौकरी मिलेगी। सरकारी दावों की हकीकत तो बाद में सामने आयेगी, मगर राज्य के युवाओं को प्रशिक्षित करने की जरूरत है, ताकि राज्य की श्रमशक्ति का सार्थक उपयोग हो सके। राज्य सरकार ने प्रत्येक तहसील पर एक आईटीआई व कौशल विकास केंद्र खोलने की घोषणा की है ताकि नौजवानों के हुनर को मंच मिले। शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर चुके हैं जब उन्होंने कहा कि राज्य में प्रशिक्षित स्नातकों की परीक्षा में 70 फीसदी अभ्यर्थी अनुत्तीर्ण हो गये थे। दरअसल, मौजूदा दौर में निजीकरण ने रोजगार के स्वरूप में बदलाव किया है। आज जब यह सुनिश्चित है कि भविष्य निजी क्षेत्र में ही है तो छात्रों को तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा दिलाना ही प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो युवा निजी क्षेत्र में मनमाफिक नौकरियां हासिल कर सकते हैं। उदारीकरण के दौर में रोजगार के नये अवसर पैदा हुए हैं। उद्यमिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, यदि युवा जोखिम के साथ उद्यमशीलता विकसित करें। बदलते वक्त के साथ ही कारोबार जगत में नए खिलाड़ी भी अपना स्थान बना सकते हैं। स्टार्टअप के जरिये अपना भविष्य बना सकते हैं। सरकार की ऋण योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। समय के साथ अब सरकारी नौकरियों का मोह भी कम हुआ है और निजी कारोबार करना अब धीरे-धीरे प्राथमिकता बनता जा रहा है। कोशिश हो यह अब सिर्फ महानगरों तक सीमित न रहे। ग्रामीण व छोटे  शहरों से भी ऐसी पहल हो कि युवा अपने घर से कारोबार चला सकें।

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