चंडीगढ़ के सेक्टर 37 में लॉ भवन में रविवार को आयोजित कान्फ्रेंस के दौरान वकीलों को सर्टिफिकेट प्रदान करतीं जस्टिस इंद्रा बनर्जी। -नितिन मित्तल

चंडीगढ़, 2 फरवरी (ट्रिन्यू)
इंटरनेशनल लॉ कान्फ्रेंस के दूसरे दिन सेक्टर-37 के लॉ भवन में आयोजित समापन समारोह में सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस इंद्रा बनर्जी ने बतौर मुख्य अतिथि ने भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में महिला जजों की अच्छी-खासी संख्या अपने आप में काबिलेतारीफ है। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल भी इसके लिये बधाई की पात्र है जिन्होंने महिला साथियों को आगे बढ़ाने के लिये प्रोत्साहन दिया। जस्टिस बनर्जी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिये महिलाओं को और अधिक प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है।
रायल कोर्ट आफ जस्टिस इंगलैंड एंड वेल्स की जस्टिस चीमा ग्रब ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में महिलाओं को और बड़ी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि महिला वकीलों को आगे बढ़ाने के लिये उनकी हौंसलाअफजाई करें ताकि वे भी बड़ा रोल अदा कर सकें। वह पहली ऐसी एशियाई महिला हैं जिन्हें इस ओहदे तक पहुंचने का गौरव मिला है।
इस मौके पर आज जस्टिस इंद्रा बनर्जी के अलावा रायल कोर्ट आफ जस्टिस इंगलैंड एंड वेल्स की चीमा ग्रब, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की जज जस्टिस दया चौधरी, राजस्थान हाईकोर्ट की जज जस्टिस सबीना, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की जज जस्टिस निर्मलजीत कौर, जज जस्टिस रितु बाहरी, जस्टिस लीजा गिल और जस्टिस जयश्री ठाकुर भी उपस्थित थीं। बार कौंसिल आफ इंडिया और बार कौंसिल आफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सांझे प्रयासों से आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के न्यायविदों एवं कानून के जानकारों ने भाग लिया। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की बार कौंसिल के चेयरमैन हरप्रीत सिंह बराड़ ने सभी मेहमानों और सम्मेलन में आये प्रतिभागियों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि कल सीजेआई बोबडे ने कहा था कि गुरुनानक देव जी केवल सिखों और पंजाब के ही नहीं हैं बल्कि वे पूरी दुनिया के हैं, मानवता के हैं, में जोड़ते हुए कहा कि सिख धर्म के प्रचारक थे जिन्होंने महिलाओं को बराबर के हक दिलाने और उन्हें पूरा सम्मान दिये जाने पर जोर दिया था। बराड़ ने कहा कि हम बड़े फख्र के साथ कह सकते हैं कि हमारे यहां इसीलिये इतनी बड़ी इतनी तादाद में महिला जज हैं। उन्होंने कहा कि यह समारोह गुरु नानक देव जी के 550वें जन्मदिवस वर्ष को समर्पित है। जस्टिस चीमा ने कहा कि जब पांच साल बाद वे आयें तो उन्हें और ज्यादा महिला जज यहां दिखें और वे अपने अनुभव सांझा करने को आगे आयें।

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