71 की उम्र में 17 का जोश
प्रदीप साहू/निस
चरखी दादरी, 2 फरवरी
71 की उम्र में 17 का जोश। जब वो दौड़ लगाते हैं तो युवा भी उनके आगे पानी भरते नजर आते हैं। हम बात कर रहे हैं दादरी के गांव कमोद के 71 वर्षीय धावक रामफल फौगाट की। रामफल सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर 36 मेडल जीत चुके हैं। हॉफ मैराथन रामफल ने अपना ही रिकार्ड तोड़कर नया रिकार्ड बनाया। रामफल अब विदेशी धरती पर देश का नाम रोशन करने का सपना संजोए है। बावजूद सरकार द्वारा कुछ सहायता दी जाए। सेवानिवृति के बाद भी दादरी के गांव कमोद निवासी धावक रामफल फौगाट खेल जगत से जुड़े रहे और अनेकों राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पदकों का ढेर लगा दिया। रामफल ने सेवानिवृत होने के बाद से अब तक 36 मेडल जीते हैं, जिनमें 25 गोल्ड मेडल शामिल हैं। रामफल 71 की उम्र पार करने के बाद भी ऐसे दौड़ते हैं कि जवान भी उनको देखकर हैरान रह जाते हैं। हर रोज घर के कार्य करके खेतों के कच्चे रास्तों में सुबह-शाम 8 किलोमीटर की दौड़ लगाते हैं। पिछले दिनों मुम्बई में हुई हाफ मैराथन दौड़ में रामफल ने रिकार्ड बनाकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया है। इसके अलावा छोटी दौड़ प्रतियोगिता में भी रामफल ने कई पुरस्कार हासिल किए। ओल्ड ब्वाय के नाम से प्रसिद्ध रामफल अब तक राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर 36 मेडल जीत चुके हैं।
रिटायरमेंट के बाद जीते 36 मेडल
जिस उम्र में लोग अपने पैरों पर सही से खड़े भी नहीं हो पाते हैं, उस उम्र में इस बुजुर्ग ने दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। जहां लोग छोटी सी उम्र से ही एथलीट बनने की तैयारी करते हैं, लेकिन रामफल ने नौकरी से सेवानिवृति लेने के बाद 65 वर्ष की उम्र से इसकी शुरुआत की। रामफल बताते हैं कि वो सुबह 4 बजे उठकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं, जिसमें वो लगातार दौड़ और पैदल चलने का अभ्यास भी करते हैं। इसके अलावा वो इस उम्र में भी 10 किलोमीटर तक दौड़ लगाते हैं।
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