‘इस्तीफे’ के बाद भी बरकरार हैं चौधरी बीरेंद्र सिंह
हरीश लखेड़ा/ट्रिन्यू
नयी दिल्ली, 16 दिसंबर
भाजपा नेता राज्यसभा सदस्य चौधरी बीरेंद्र सिंह भले ही उच्च सदन से इस्तीफे का दावा कर चुके हों, लेकिन वे अब भी राज्यसभा के ‘माननीय’ सदस्य हैं। संसद के शीतकालीन सत्र की कुल 20 बैठकों में से 15 बैठकों में बीरेंद्र सिंह ने भाग लिया। चौधरी का कार्यकाल एक अगस्त 2022 तक का है। हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद 17 नवंबर को चौधरी बीरेंद्र सिंह ने जींद के उचाना कस्बे में कार्यकर्ताओं के बीच कहा था कि वे उप-राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा देकर सीधे आपके बीच आए हैं। तब उन्होंने कहा था कि राज्यसभा में अभी उनका पौने तीन साल का कार्यकाल बचा है, लेकिन नैतिकता के आधार पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया हैं, ताकि भाजपा पर परिवारवाद का आरोप न लगे। दरअसल, यह बैठक भाजपा उम्मीदवार व उनकी पत्नी प्रेमलता के चुनाव में हार के कारण जानने के लिए बुलाई गई थी। चौधरी की इस घोषणा के बाद अगले दिन मीडिया में उनके इस्तीफे की खबरें भी प्रमुखता से छपीं।
‘दैनिक ट्रिब्यून’ ने सोमवार को चौधरी से उनके इस्तीफे को लेकर पूछा तो उनका जवाब था कि वे आज भी राज्यसभा सदस्य हैं। उन्होंने कहा वे तो इस्तीफा दे चुके थे, लेकिन उसके बाद उन्हें मालूम नहीं कि क्या हुआ? बहरहाल, यहां 16 तालकटोरा रोड पर उनको सरकारी बंगला भी मिला हुआ है। यह तीसरा मौका था जब चौधरी के इस्तीफे की खबरें आईं। सबसे पहले चौधरी के इस्तीफे की खबर अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव के समय आई। अपने आईएएस बेटे विजेंद्र सिंह को लोकसभा का टिकट दिलाने के लिए उन्होंने आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत इस्तीफे की पेशकश की थी। चौधरी ने तब यह भी कहा था कि यदि उनके बेटे को लोकसभा का टिकट दे दिया जाता है तो वे सक्रिय चुनावी राजनीति से संन्यास ले लेंगे। तब यह बात भी जोर-शोर से उड़ी थी कि चौधरी बीरेंद्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे की भी पेशकश की है। तब भाजपा ने उनके बेटे को हिसार से उम्मीदवार बना दिया और वे जीत कर लोकसभा पहुंच गए। माना जाता है कि उन्होंने यह इसलिए कहा कि पार्टी और उन पर परिवारवाद के आरोप न लगे, क्योंकि उनकी पत्नी प्रेमलता तब विधायक थीं।
चौधरी के इस्तीफे को लेकर दूसरी बार विधानसभा चुनाव के दौरान खबर आई। दरअसल, विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पदों पर आसीन नेताओं के परिजनों को टिकट देने से साफ इनकार कर दिया था। तब हरियाणा से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह भी अपनी बेटी के लिए विधानसभा का टिकट मांग रहे थे। भाजपा हाईकमान ने उनकी बेटी को टिकट नहीं दिया, जबकि चौधरी की पत्नी प्रेमलता की टिकट को लेकर कहा गया कि वे तो सीटिंग विधायक हैं। बहरहाल, चौधरी बीरेंद्र सिंह एक अगस्त 2022 तक राज्यसभा सदस्य हैं।
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