मदन गुप्ता सपाटू
ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है, जो इस बार 3 जून को है। शनि की कृपा पाने के लिए इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। खासकर शनि की साढ़ेसाती, ढैया या महादशा चल रही हो, तो इस दिन पूजा व उपाय करने से विशेष फल मिलता है। ज्येष्ठ माह की यह अमावस्या इस बार सोमवार को है, इसलिए भी इसका खास महत्व है। सोमवती अमावस्या को गंगा व तीर्थ स्नान करने, जरूरतमंदों को भोजन कराने, पितरों के लिए पूजन व दान करने को फलदायी माना जाता है।
ज्योतिषशास्त्र में शनि का विशेष महत्व माना गया है। जन्मकुंडली में शनि की स्थिति का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शास्त्रों में शनि को सूर्य का पुत्र माना गया है। शनि को न्याय का देवता और कर्मफल दाता भी माना जाता है।

ऐसे करें पूजा
शनि जयंती के दिन सुबह स्नान के बाद लकड़ी के पाटे पर काला कपड़ा बिछाकर उस पर शनि की प्रतिमा, फोटो या सुपारी रखें और पानी, दूध, पंचामृत, घी से स्नान करायें तथा इत्र लगायें। उन पर अबीर गुलाल, सिंदूर, कुमकुम एवं काजल लगाकर नीले फूल अर्पित करें। दोनों ओर शुद्ध तेल का दीप और धूप जलायें। शनि देव को इमरती व तेल में तली वस्तुओं का भोग लगायें। फल और नारियल भी अर्पित करना चाहिए। इसके बाद इस मंत्र का कम से कम एक माला जाप करें-
ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नमः॥
इसके बजाय ॐ शं शनैश्चराय नमः॥ मंत्र का भी जाप कर सकते हैं।
मंत्र जाप के बाद शनि आरती करके उनको साष्टांग नमन करना चाहिए। पूजा के बाद अपने सामर्थ्य अनुसार दान देना चाहिए। जरूरतमंदों को काला कपड़ा, काली उड़द दाल, छाता, जूता, लोहे की वस्तु का दान कर सकते हैं। गरीबों को भोजन कराना चाहिए।

विशेष उपाय
n शनि से संबंधित चीजों, जैसे काला कपड़ा, चमड़े के काले जूते, साबुत उड़द, लोहा, तेल, काला कंबल आदि का दान करें।
n जो मन और कर्म से सात्विक होता है और जरूरतमंदों की मदद करता है, शनिदेव उसकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करें। यदि माता-पिता से दूर रहते हैं तो उन्हें फोन से या मन ही मन प्रतिदिन प्रणाम करें। बुजुर्गों का अपमान नहीं करें।
n यदि शनि की ढैया या साढ़ेसाती चल रही है और खुद को परेशानियों से घिरा पा रहे हैं, तो शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ पर बांधें तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
n शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।
n बजरंग बली की साधना से भी शनि से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।
n दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें। शनिवार को तिल के तेल का दीपक जलाएं। तिल के तेल से भगवान शनि का अभिषेक करें। काले उड़द, काले तिल या काले चने सामर्थ्य अनुसार दान करें। शनिवार का व्रत रखकर शनि व्रत कथा का पाठ करें।

ज्येष्ठ अमावस
2 जून शाम 4:38
से 3 जून 3:30 बजे तक

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