वास्तुशास्त्र में दिशाओं को विशेष महत्व दिया गया है। हर दिशा की अपनी एक उर्जा व प्रभाव होता है और उस दिशा व उसके महत्व को समझकर कार्य किया जाए तो यकीनन प्रतिफल उम्मीद से कहीं अधिक होता है। यूं तो लोग घर में कई चीजों को बनवाते समय दिशाओं का ख्याल रखते हैं, लेकिन पूजा करते समय उसकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। अगर आप पूजा करते समय भी दिशा का ख्याल रखेंगे तो ईश्वर की कृपा आप पर हमेशा बरसती रहेगी। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

सामान्य तौर पर पूजा करते वक्त मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करना चाहिए। वास्तु ग्रंथों में कहा गया है कि धन प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा एवं ज्ञान प्राप्ति के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके की गई पूजा चमत्कारिक लाभ देती है। यद्धपि प्रत्येक दिशा के अपने देवता हैं, जो उस दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए उस क्षेत्र के देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उस दिशा विशेष में ही पूजा करना उत्तम रहता है।

देवी माँ और हनुमान जी की पूजा दक्षिण दिशा में, धन की दिशा उत्तर में गणेश, लक्ष्मी जी एवं कुबेर की व उत्तर-पूर्व दिशा में शिव परिवार, राधा-कृष्ण और पूर्व दिशा में श्री राम दरबार, भगवान विष्णु की आराधना एवं सूर्य उपासना करने से परिवार में सौभाग्य की वृद्धि होती है।

आरोग्य की उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान धनवंतरि, अश्विनी कुमार एवं नदियों की आराधना करने से उत्तम स्वास्थ्य एवं सुख की प्राप्ति होती है।

शिक्षा की दिशा पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में विद्यादायिनी माँ सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान में वृद्धि होती है। पश्चिम दिशा में गुरु, महावीर स्वामी, भगवान बुद्ध की पूजा शुभ फल प्रदान करती है।

संबंधों और जुड़ाव की दिशा दक्षिण-पश्चिम में पूर्वजों की पूजा सुख-समृद्धि प्रदान करेगी।



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