फिल्म रेटिंगः डेढ़ स्टार

अवधिः दो घंटे तीन मिनट

निर्माताः फौक्स स्टार स्टूडियो,राज कुमार गुप्ता और मारा कणर

लेखक व निर्देशकः राज कुमार गुप्ता

कलाकारः अर्जुन कपुर, राजेंद्र गुप्ता, राजेश शर्मा, प्रशांत अलेक्जेंडर, शांतीलाल मुखर्जी, देवेंद्र मिश्रा,गौरव मिश्रा, आसिफ खान, बजरंगबली सिंह, प्रवीण सिंह सिसोदिया, राजीव कचारू, सुदेव नार व अन्य.

संगीतकारः अमित त्रिवेदी

कैमरामैन: डूडली

किसी भी सत्य घटनाक्रम पर एक बेहतरीन फिल्म का निर्माण करना निर्देशक के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है, इस कसौटी पर फिलमकार राजकुमार गुप्ता बुरी तरह से विफल हुए हैं. वह 2013 की सत्य घटना कांठमांडू से इंडियान मुजाहिदीन के संस्थापक यासीन भटकल की गिरफ्तारी पर एक स्तरहीन फिल्म ‘‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’’लेकर आए हैं.

कहानीः

फिल्म की कहानी पुणे में बमविस्फोट से शुरू होती है.राष्ट्ीय सुरक्षा इंटेलीजेंस,एनआइए और रॉ सभी बम विस्फोट करने वालों की जानकारी पाने में विफल रहते हैंं.अंततः सभी यह मान लेते हैं कि यह बम विस्फोट कोई ‘भूत’कर रहा है.तो दूसरी तरफ मुंबई व दिल्ली सहित कई शहरांे में लगातार बम विस्फोट ेहोते रहते हैं.देश की सुरक्षा से जुड़ी एजंसियों का मानना है कि बम विस्फेाट करने वाला मुख्य आरोपी युसुफ व उसके साथी पाकिस्तान व दुबई में जाकर बैठे हैं.पर एक दिन इंटेलीजेंस आफिसर प्रभात(अर्जुन कपूर) को फोन पर खबर मिलती है कि  बम विस्फोट का मुख्य आरोपी युसुफ काठमांडू, नेपाल में है.अब प्रभात काठमंाडू जाना चाहता है,प उसका बॉस राजेश सिंह( राजेश शर्मा) इसके लिए अपने उच्च अधिकारियें से इजाजत नही दिला पाता.पर प्रभात अपने पॉंच साथियों के साथ बिना इजाजत काठमांडू पहुंच जाता है.फिर कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं.अंततः प्रभात अपने मिशन में कामयाब होकर यानीकि युसुफ को गिरफ्तार करके ही वापस लौटता है.

निर्देशन

‘‘नो वन किल्ड जेसिका लाल’ सहित कई यादगार फिल्मों के निर्देशक राज कुमार गुप्ता इस बार विफल रहे हैं. यह एक अति स्तरहीन जासूसी फिल्म है. पूरी फिल्म में जांच प्रकिया हास्यास्पद ही है. फिल्म में बेवजह अमरीका के एअरपोर्ट पर शाहरुख खान को सुरक्षा जांच के नाम पर हुई घटना को भी ठूंसा गया है. पटकथा लेखक व फिल्मकार ने प्रभात के काम में रोड़ा डालने के लिए नेपाल में भी आईएएस एजंटों के जाल,शत्रुतापूर्ण नेपाल सुरक्षा बल,पाकिस्तानी दूतावास  और भारतीय अधिकारियों द्वारा बम विस्फाटे के आरोपियों को पकड़ने में अनिच्छा सहित कई चीजें जरुर पिरोयी हैं, पर फिल्म में रोमांच पैदा नहीं होता. देशभक्ति भी नही उभरती.

फिल्म की गति बहुत धीमी है.यह फिल्म नीरसता और बोझिल के अलावा कुछ नहीं. इसमें मनोरंजन के तत्वों का घोर अभाव है. जबकि जासूसी फिल्मों में रोचकता, मनोरंजन के साथ साथ रोमांचक तत्व काफी अच्छे ढंग से पिरोए जा सकते हैं.

अभिनयः

अर्जुन कपूर की मेहनत सफल नहीं हुई है.उनके चेहरे पर कहीं भी सही भाव नही आते. फिल्म के किसी भी कलाकार का अभिनय प्रभावित नहीं करता.

Edited by Rosy

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