बच्चों के साथ मज़बूत करें रिश्ता
मोनिका शर्मा
हमारे परिवारों में अक्सर यह देखने में आता है कि बच्चा अपने पिता या परिवार के अन्य सदस्यों का अपमान करता है तो मां उसे सबसे पहले रोकती है। मां आगे बढ़कर बच्चे को इस नेगेटिव बिहेवियर के लिए टोकती है। लेकिन देखने में आता है कि बच्चों का ऐसा ही रूखा और कटु व्यवहार जब मां के प्रति हो तो घर का कोई भी सदस्य उन्हें न रोकता- टोकता है और न ही समझाइश देता है। घर के सदस्यों का ऐसा यह माहौल मां के प्रति बच्चों के बिहेवियर को और बिगाड़ता है। ऐसे में बड़े हो रहे बच्चे को मां के साथ कैसे व्यवहार करना है घर के सदस्य यह ज़रूर समझाएं। इससे मां बच्चे का रिश्ता और बेहतर होगा।
जो मां अपने बच्चों को परिवार के दूसरे सदस्यों का मान करने की सीख देते नहीं थकती। उसका मान करने का पाठ बच्चों को कोई नहीं पढ़ाता। देखने में यह बहुत आम-सी बात है पर घर का ऐसा माहौल मांओं का मन व्यथित कर जाता है।
परिवार उठाये जिम्मेदारी
मां और बच्चे का रिश्ता इस संसार में सबसे अनोखा रिश्ता है। यह एक ऐसा संबंध है जो अहसासों की बुनियाद पर टिका है। ऐसे में अपने बच्चों की हर अच्छाई-बुराई को स्वीकार उनका संबल बनने वाली मांओं को बच्चे कई बार कम आंकते हैं। खासकर वे माताएं जो गृहिणियां हैं। अपने जीवन का हर पल बच्चों की परवरिश में कुर्बान करने वाली मांओं के लिए कई परिवारों में बच्चों का व्यवहार बहुत ज्यादा कटु और मन दुखाने वाला भी होता है। बच्चों के ऐसे व्यवहार को घर के अन्य सदस्य बहुत हल्के में लेते हैं। ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी है कि बच्चों को यह पाठ पढ़ायें कि वे अपनी मां का मान करना सीखें। घर के बच्चों और बड़ों को मिलकर सोचना होगा कि अहसास की डोर से बंधे इस रिश्ते में अपमान को स्थान ही क्यों मिले ?
हंसने का विषय नहीं
घर-परिवार में बच्चों या बड़ों द्वारा मांओं के बारे में कही गई बातें कई बार मजाक का मुद्दा बन जाती हैं। घर के बड़ों को सोचना चाहिए कि बच्चों का यूं अपनी मां का अपमान करना हास्यास्पद नहीं एक विचारणीय विषय है।
अगर समय रहते नहीं सोचा जाता तो बच्चों का पूरा व्यक्तिव ही नकारात्मक मोड़ ले लेता है। इसलिए ज़रूरी है कि कम उम्र में ही बच्चों की यह सीख दी जाए कि मां के सम्मान का हर हाल में ख्याल रखें। मां से मिलने वाले प्यार और दुलार को बच्चे जब भी कम आंकें तो पिता और घर के दूसरे बड़े बुजुर्गों को बच्चों को समझाइश देनी चाहिए। मां के विचार और व्यवहार में अगर बच्चे कमियां खोजने लगें तो यह पीड़ादायक है। अपनी नींद, भूख सब बच्चों के लिए कुर्बान करने वाली मां के प्रति बच्चे कभी जब नकारात्मक रुख अपनाते हैं तो घर के हर सदस्य को इसमें दखल देनी चाहिए।
संस्कारों की पहली सीढ़ी
मां का सम्मान यानी कि इंसानियत का मान। यह सीख किसी भी घर के बच्चों को दिए जाने वाले संस्कारों की पहली सीढ़ी होनी चाहिए। अपने लिए अपना समय और ऊर्जा लगाने वाले किसी भी इंसान की इज्ज़त करने की सीख की शुरुआत मां के प्रति आभार जता कर ही ली जा सकती है। जो माताएं बच्चों की खूबियों और खामियों स्वीकार करते हुए उन्हें जीवन की नई ऊंचाइयों पर ले जाती है उसके प्रति बच्चों में हमेशा का मान करने का भाव ही होना चाहिए। मां को किस बात से खुशी मिलती है? कौन-सी बात उसका दिल दुखाती है , यह बचपन से ही बच्चों की सिखाना चाहिए। क्योंकि भावनाओं और संवेदनाओं से भरे इस रिश्ते की अहमियत समझना हर बच्चे के लिए ज़रूरी है।
अनमोल भागीदारी का मोल समझाएं
बच्चों की परवरिश में मां अपना श्रम ही नहीं सपने भी लगा देती है लेकिन हमारे परिवारों में इस जॉब का मोल नहीं रह जाता है। बड़े होकर बच्चे मां की भूमिका का वह मान ही नहीं करते, जिसकी वह हक़दार हैं। ऐसे में घर-परिवार के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को मां के इस अनमोल रोल का मोल समझाएं। उन्हें बताएं कि उनकी जिंदगी को सहज रखने और सहूलियतें देने के लिए उनकी मां ने खुद को भी भुला दिया है। बच्चों के मन यह संवेदनशीलता लानी जरूरी है कि उनका बिहेवियर और बोली दोनों मां के मन को ठेस पहुंचाते हैं। भले ही कोई मां यह नहीं बताती पर उनका भी मन दुखता है। कहते हैं कि मां बच्चों की पहली शिक्षक होती है और परिवार पहली पाठशाला। ऐसे में जब मां घर के छोटे सदस्यों को सभी मान करना सिखा सकती है तो पूरी पाठशाला उन्हें मां का सम्मान करना क्यों नहीं सिखा सकती?
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