Blog: काले झण्डे के समर्थक अबतक ख़ामोश हैं
हो सकता है आपको याद भी हो या याद नहीं भी है तो इस बात के लिए गूगल कर लीजिए कि साल 2014 से अब तक कितने ऐसे मौक़े आए जब लिखने और कहने वालों ने काले झण्डे दिखाए जाने को सही माना और कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज़/प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए। कुछ दिनों पहले बिहार के बेगूसराय से काले झण्डे दिखाए जाने की ख़बर आई थी, तब से लेकर आजतक मैं उन लोगों कि लेखनी और वक्तव्य को ढूंढ रहा हूँ, जो तब लोकतंत्र में काले झण्डे का समर्थन कर रहे थे। जानना चाहता हूं कि इस घटना में उन लोगों ने काले झण्डे का समर्थन किया है या नहीं। यदि मैं बात करूं अपने मित्रों की जो काले झण्डे के समर्थन में इन पांच सालों में अपनी आवाज़ बुलन्द किए, अब ख़ामोश हैं। कुछ तो ऐसे व्यवहार कर रहे हैं कि उनको पता ही नहीं है कि कन्हैया को काला झण्डा दिखाया गया है।from India TV: india Feed http://bit.ly/2GJOOEo
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