जन संसद

कानून सख्त हो
कुख्यात अपराधी विकास दुबे द्वारा आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या ने खाकी, खादी और अपराधियों की सांठगांठ को उजागर किया है। इसको राेकने के लिए चुनाव आयोग को चुनाव में अनैतिक तरीके अपनाने वाले राजनेताओं की उम्मीदवारी व चयन रद्द करने पड़ेंगे। पुलिस को हर केस की जांच ईमानदारी से करनी होगी और न्यायिक तंत्र को गवाहों के लिए विटनेस प्रोटेक्शन सिस्टम को ठीक करना पड़ेगा। न्यायपालिका यदि तय कर ले तो कानूनन अपराधियों और राजनेताओं के घालमेल पर रोक लग सकती है।
देवी दयाल दिसोदिया, फरीदाबाद

जनता नकारे
देश में अपराध की जड़ें पाताल तक पहुंच चुकी हैं परन्तु राजनीतिक संरक्षण से उत्साहित अपराधी कालांतर भस्मासुर बन जाते हैं, जिनका इलाज जनता ही कर सकती है। जब चुनाव होते हैं तो गुंडे, बाहुबली, दागी तथा आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के प्रलोभनों में फंसकर जनता उनको वोट न दे। राजनीतिक दलों को भी ऐसे दागी प्रत्याशी नहीं बनाने चाहिए। चुनाव आयोग को ऐसे अवांछनीय उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया के दौरान हटाने का अधिकार दिये जाने की जरूरत है।
एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र

न्यायिक सक्रियता जरूरी
कुख्यात अपराधी विकास दुबे द्वारा आठ पुलिस कर्मियों की निर्मम हत्या बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं थी। एक गैंगस्टर द्वारा ऐसी दिल दहला देने वाली घटना कानून व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाती है। यह राजनीति के अपराधीकरण का यह एक ऐसा काला सच है, जिसका दुष्प्रभाव समाज में बढ़ता ही जा रहा है। अराजक तत्वों पर लगाम कसने के लिए कठोर एवं कारगर उपायों पर अमल समय की मांग है। पुलिस को भी सशक्त किया जाये। न्यायपालिका भी ऐसे मामलों के प्रति सक्रियता दिखाये।
रवि नागरा नौशहरा, साढौरा

संरक्षण खत्म हो
इस मुद्दे पर सारे राजनीतिक दल एक जैसे नजर आते हैं। अपराधियों को संरक्षण तो बाद की बात है, पहले देश की राजनीति में अपराधियों के प्रवेश को रोका जाना चाहिए। आज राजनीति और अपराध जगत एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं। राजनेता अपने जो काम कानून के दायरे में रहकर नहीं कर सकते, वे अपराधियों से करवाते हैं। अपराधियों की बदौलत राजनेता सुरक्षा कवच पहने रहते हैं। कठोर कानून बनाकर इस संरक्षण को खत्म किया जा सकता है। दागी उम्मीदवारों को राजनीति से दूर रखा जाए।
सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

संरक्षण ना मिले
इसमें कोई संदेह नहीं कि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है। राजनीतिक संरक्षण, रिश्वतखोरी ही कुख्यात विकास दुबे जैसे अपराधियों को जन्म देती है। इसी राजनेताओं और अपराधियों की सांठगाठ का नतीजा उ. प्र. के आठ पुलिसकर्मियों की हत्या से जगजाहिर हो चुका है। कानपुर जैसी घटना से प्रत्येक नागरिक के जहन में एक बात आती है कि अपराधियों को संरक्षण नेताओं की बदौलत मिलता है। अब नये ईमानदार युवा नेताओं को मौका मिले और हर नेता व पुलिस प्रशासन बिना किसी सांठगाठ के ईमानदारी से अपना काम करे।
सतपाल सिंह, करनाल

नकेल कसें
अगर आज अपराधी आजाद हैं तो उसका मुख्य कारण उन्हें किसी न किसी प्रकार का संरक्षण जरूर मिल रहा है। यदि अपराधियों को ऐसे राजनीतिक संरक्षण मिलता रहेगा तो आने वाले समय में हम न जाने कितने पुलिस के जवानों को हम खो देंगे। इन अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण से ही गलत काम करने के लिए बल मिलता है। दोनों ही एक-दूसरे से अपने स्वार्थों को पूरा करते हैं। यदि इन पर रोकथाम लगानी है तो अपराधियों को संरक्षण देने वालों पर नकेल कसने की जरूरत है। जनता को जागरूक होकर ऐसे नेताओं को चुनाव में वोट न देकर इन्हें राजनीति से दूर करना होगा।
वन्दना सिंह, बरेली, उ.प्र.

पुरस्कृत पत्र

स्वतंत्र-सक्षम हो पुलिस
अपराधियों को जो राजनीतिक संरक्षण मिलता है, असल में वह पुलिस संरक्षण है जो नेताओं के हुक्म पर पुलिस गुंडों को देती है। अपराधियों का राजनीतिक संरक्षण ख़त्म करने के लिए पुलिस को इस गठजोड़ से अलग करना होगा। पुलिस प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करके उसे पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा। पुलिस में राजनीतिक हस्तक्षेप के सभी रास्ते बंद करके पुलिस को कानून सम्मत कार्रवाई करने की छूट देनी होगी। इसके बाद भी अगर विकास दुबे जैसे गैंगस्टर पनपें तो ज़िम्मेदार भी सिर्फ पुलिस ही हो।
बृजेश माथुर, गाजियाबाद, उ.प्र.

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