किफायती इलाज
पूरे देश में हो उपचार दरों का निर्धारण
निस्संदेह कोरोना वायरस की महामारी ने चिकित्सा व्यवस्था की प्राथमिकताओं को नये सिरे से निर्धारित करने की जरूरत बतायी है। अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के चलते कोरोना से हमारी लड़ाई कमजोर हुई है। ऐसे में जब देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा दस लाख पार गया है और मरने वालों की संख्या 26 हजार से अधिक हो गई है, चिकित्सा तंत्र की विसंगतियों को तुरंत दूर किया जाये। सरकारी चिकित्सालयों में उपचार तो मुफ्त है मगर वहां चिकित्सा सुविधाएं नाकाफी हैं। दूसरी ओर निजी क्षेत्र में इलाज आम लोगों की पहुंच से बाहर है। ऐसे में पंजाब सरकार द्वारा निजी अस्पतालों में कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिये कम कीमतों का निर्धारण करना समय की जरूरत है। हालांकि, बेहतर होता कि जब हरियाणा सरकार ने निजी अस्पतालों में उपचार की दरों का निर्धारण किया तभी पहल पंजाब में हो जानी चाहिए थी। निस्संदेह यह स्वागतयोग्य कदम है और महामारी के प्रकोप से जूझने वाले रोगियों के लिये राहतकारी भी है। ऐसे वक्त में जब सरकारी अस्पताल मरीजों के दबाव के चलते चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं, निजी अस्पताल में उपचार लागत को न्यायसंगत बनाना वक्त की जरूरत है। वहीं निजी अस्पताल उपचार की दरों को कम किये जाने को अनुचित बताते हुए दलील दे रहे हैं कि रोगियों में कोरोना का इलाज करने के साथ अन्य रोगों का उपचार भी करना होता है। केवल लागत पर ध्यान देने की बजाय उपचार की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाये।
दरअसल, सरकार व अदालतें गाहे-बगाहे कहती रही हैं कि सरकार अस्पतालों को सस्ती जमीन व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराती है, अत: संकट की इस घड़ी में निजी अस्पतालों को देश व मानवता के प्रति अपना दायित्व निभाना चाहिए। वहीं निजी अस्पताल अपनी लागत बढ़ने का दावा करते हुए दलील दे रहे हैं कि इस साल आम बजट में विदेशों से आयात किये गये उन उपकरणों पर अतिरिक्त कर लगाया गया जो विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिये प्रयुक्त किये जाते हैं। माना जा रहा है कि निजी अस्पतालों में उपचार खर्च निर्धारण का कार्य राज्य सरकारों पर छोड़ने के बजाय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पूरे देश में किया जाए, ताकि उपचार की कीमतों में सारे देश में एकरूपता बनी रहे। कोरोना संक्रमण के प्रसार को देखते हुए इलाज की दरों में कमी होनी चाहिए ताकि कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई मजबूत हो सके। कमोबेश यही स्थिति कोरोना संक्रमण की जांच से जुड़ी है। जांच सस्ती होगी तो समय रहते कोरोना संक्रमण का पता लगाकर उपचार किया जा सकेगा। आईआईटी दिल्ली ने कम लागत वाली परीक्षण किट तैयार की है, जिसका यथाशीघ्र व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया जाए। साथ ही कोरोना के उपचार में इस्तेमाल की जा रही दवाओं की कीमत पर मुनाफाखोरी रोकने के प्रयास होने चाहिए, जिसमें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की भी मदद ली जानी चाहिए। बहरहाल, इस संकट से सबक लेकर हमें चिकित्सा संस्थानों में सुविधाओं के विस्तार के साथ ही इनके नियमन की गंभीर पहल भी करनी होगी।
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