जिनके लिए स्वर्णकाल है कोरोना संकट
आलोक पुराणिक
गणित बदल रहा है, गणित के सवाल भी बदलेंगे। गणित की आगामी परीक्षाओं में कुछ इस तरह के सवाल आ सकते हैं—
फलां फाइव स्टार अस्पताल कोरोना के एक मरीज से पंद्रह लाख रुपये चार्ज करता है, उस अस्पताल को 1500 करोड़ का टर्नओवर हासिल करने के लिए कितने कोरोना मरीजों का इलाज करना पड़ेगा।
एक परिवार में चार बंदे हैं और चारों को कोरोना हो गया है। कोरोना के एक मरीज के इलाज में 15 लाख खर्च होते हैं, और उस परिवार का घर का खर्चा करीब पचास हजार रुपये महीना है। बताइये कि कोरोना काल में प्रति व्यक्ति आय हर महीने कितनी होनी चाहिए?
पुरानी बीमारियां बहुत इनफीरियरटी कांप्लेक्स में होंगी। हार्ट की बीमारी को कभी रहा होगा गुमान कि पांच-सात लाख के आपरेशन से ठीक होती है। अब कोरोना ने हार्ट को पीट दिया है। कैंसर को रहा गुमान बरसों बरस कि दस लाख से कम में इलाज न हो पाता कैंसर का। अब कैंसर भी कोरोना के खर्च के आगे नतमस्तक पड़ा हुआ है। बदला हुआ वक्त है। पुरानी बीमारियों के एमडी, एमएस डॉक्टरों को कोई पूछ नहीं रहा है और बाबा बंडाचार्य दिन में आठ घंटे कोरोना से मुकाबला करने के लिए चूर्ण और काढ़ा बता रहे हैं।
सरकारें जहां फेल हो जाती हैं, वहां निजी क्षेत्र के मुनाफे विशेष योग्यता, डिस्टिंक्शन से पास होने लगते हैं। अब सरकारी अस्पताल फेल हो रहे हैं, तो निजी अस्पताल कोरोना पैकेज लेकर आ गये हैं। सरकारी अस्पताल लगता है कि होते ही इसलिए हैं कि फेल हो सकें। निजी अस्पतालों के पैकेज चल रहे हैं—दस लाख, पचास लाख।
धंधा बहुआयामी है। कारपोरेट अस्पताल चला रहे एक दोस्त ने मुझसे पूछा—सोच रहा हूं कि अस्पताल में ही एक सुनार का खोमचा भी गड़वा दूं, यह सुनार सोना खरीदता रहेगा दिनभर उन मरीजों के परिजनों से जो कोरोना का इलाज कराने के लिए घर का सोना बेचेंगे। पांच-पंद्रह लाख रुपये की रकम देने के लिए बंदे को अपने परिवार का सोना बेचना पड़ेगा। उस काउंटर पर सोना बेचो, इस काउंटर पर रकम जमा कराओ। होशियार कारोबारी है, सोना खरीदने में भी कमायेगा और इलाज बेचने में भी कमायेगा। मैंने पूछा, कई लोगों को तो घर-दुकान भी बेचनी पड़ जायेगी दस पंद्रह लाख का इंतजाम करने के लिए।
मित्र चहका—फिर सोना खरीद के साथ-साथ मकान-दुकान खऱीद का इंतजाम भी करवा दूंगा अस्पताल में। बड़ा दिव्य दृश्य उभर रहा है—बंदा मरीज को लेकर अस्पताल में दाखिल हो रहा है। अस्पताल में रिसेप्शन के साथ ही एक टेबल पर सोना खरीद केंद्र और साथ में मकान-दुकान खरीद केंद्र बना हुआ है। बंदा पहले सोना-मकान बेच रहा है फिर मरीज दाखिल हो रहा है।
कोरोना संकट काल सबके लिए नहीं है, बहुतों के लिए तो स्वर्णकाल हो गया है जी।
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